
NARMDA NEWS: नर्मदा बांध ओवरफ्लो होकर उफनने को तैयार
भोपाल. मध्यप्रदेश को माफिया मुक्त करने का अभियान दो महीने से चल रहा है। सरकार इसके जरिए माफिया को नेस्तनाबूद करने का दावा कर रही है। इस जाल में छोटी मछलियां फंस रही हैं। माफिया को पर्दे के पीछे से संरक्षण देेने वाले सफेदपोशों तक शासन-प्रशासन के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं। जबकि माफिया मुक्त मध्यप्रदेश तभी संभव है जब इन शह देने वालों की जड़ें उखाड़ी जाएंगी।
डेढ़ दशक तक प्रदेश में सत्ता में रही भाजपा के कई नेता प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसे सींच रहे हैं। पड़ताल से उजागर होता है कि भाजपा के कई पूर्व मंत्री, विधायक और पदाधिकारियों की खनिज और रेत के अवैध खनन से लेकर शराब का अवैध कारोबार करने वालों तक से नजदीकी रिश्ते हैं। वहीं, करीब सालभर पहले सत्ता में आई कांग्रेस के कई नेताओं ने कम समय में ज्यादा पैसा देखते हुए माफिया से रिश्ते बनाना शुरू कर दिए हैं।
इंदौर संभाग : भू-माफिया सबसे ताकतवर, हवाला से जुड़े तार
प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में कुछ नेताओं के संरक्षण में भू-माफिया फलफूल रहा है। पिछले दिनों की कार्रवाई में करीब 50 माफिया सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं। वहीं, 50 से अधिक अवैध निर्माण तोड़े जा चुके हैं। 15 से अधिक समाजकंटकों पर इनाम घोषित किया है। यहां भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा के एक विधायक और प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों की माफिया से नजदीकी जगजाहिर है। महापौर रहते हुए कैलाश ने ट्यूबवेल सहित कई खनन करवाए गए जो वहां मिले ही नहीं। उसमें भी लोकायुक्त शिकायतें हुई थीं। इंदौर का नाम हवाला, ट्रांसपोर्ट, रेत खनन और शराब माफिया के सियासी गठजोड़ के कारण भी बदनाम है।
इंदौर संभाग से आदिवासियों को गुजरात ले जाकर मजदूरी कराने वाला माफिया भी सक्रिय है। यह काम अलीराजपुर के एक पूर्व भाजपा विधायक और एक पूर्व मंत्री के संरक्षण में चल रहा है। एंटी माफिया अभियान में जितने लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें से अधिकतर को कैलाश और भाजपा विधायक रमेश मेंदोला का संरक्षण था। इनमें बॉबी छाबड़ा, हेमंत यादव, युवराज उस्ताद, भरत रघुवंशी, जीतू चौधरी, निखिल कोठारी, सतवीर छाबड़ा और अरुण डागरिया शामिल है। इसी तरह इंदौर से सटे जिले से कांग्र्रेस के एक मंत्री का संरक्षण चंदू कुरील, चिराग शाह, चंपू अजमेरा, नीलेश अजमेरा, हैप्पी धवन को है। वहीं, इंदौर से एक और कांग्रेस के मंत्री का संरक्षण विक्की रघुवंशी पर है।
- कैलाश का घोटालों से नाता
इंदौर में पिछले तीन दशक से समानांतर सत्ता चलाने वाले कैलाश पर कई गंभीर आरोप हैं। उनके महापौर और मंत्री रहते हुए घोटालों की शिकायतें उनके खिलाफ हैं। इसमें सुगनीदेवी जमीन घोटाला और करोड़ों का पेंशन घोटाला प्रमुख है। पेंशन घोटाले में जस्टिस जैन जांच आयोग ने तत्कालीन भाजपा सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन सरकार ने इसे दबाकर रखा था। अब कांग्रेस सरकार रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने वाली है।
- आशा ट्रस्ट
कैलाश की पत्नी आशा विजयवर्गीय ने इंदौर विकास प्राधिकरण से आशा ट्रस्ट के नाम से 2 करोड़ 21 लाख रुपए में प्लॉट लिया था। इसकी लोकायुक्त में शिकायत हुई। इसी ट्रस्ट को पलासिया में एक सरकारी बंगला आवंटित कर दिया। यहां अकसर राजनीतिक लोगों को डेरा लगा रहता है।
- बल्लामार कांड
आकाश ने जून 2019 में नगर निगम अफसर को सरेआम बल्ला मारा। निगम की टीम अवैध मकान गिराने के लिए गई थी। बवाल होने पर आकाश जेल गए और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय समिति की एक बैठक में आकाश की तीखी आलोचना भी की।
- भाई का वृंदावन होटल
कैलाश के भाई विजय विजयवर्गीय के नाम से वीर सावरकर चौराहे पर करोड़ों का वृंदावन होटल है। इस होटल ने फुटपाथ पर भी कब्जा कर रखा है।
- सिंहस्थ घोटाला
वर्ष 2004 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए कैलाश को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने ताबड़तोड़ ठेके दिए और कई सड़कें और पुल-पुलिया बना दी। सिंहस्थ खत्म होने के कुछ समय बाद ही ये उखड़ गए। इस निर्माण कार्य में करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
- ग्वालियर चंबल अंचल : रेत और पत्थर में गहरी जड़ें
ग्वालियर-चंबल अंचल में अवैध उत्खनन, रेत और पत्थर खदानों के काले कारोबार का जोर है। मुरैना में रेत माफिया से सबसे बड़ा खतरा चंबल घडिय़ाल सेुंचरी को है। यहां रेत माफिया भाजपा, कांग्रेस और बसपा के दिग्गज नेताओं के संरक्षण में चल रहा है। पिछली भाजपा सरकार के एक पूर्व मंत्री, बसपा के पूर्व विधायक पर संरक्षण देने का आरोप है। ग्वालियर में रेत और पत्थर खनन को लेकर हाल ही में मंत्री इमरती देवी और प्रद्युम्न सिंह तोमर के बीच टकराव की स्थिति सामने आई थी। इमरती देवी ने अपने पत्र में खदानों से अवैध उत्खनन का जिक्र किया था।
अंचल में भाजपा के एक पूर्व मंत्री का ग्वालियर, डबरा और दतिया में बड़ा नेटवर्क है। इनके संरक्षण में काम करने वाले बिल्डर और भू-माफिया की लंबी फेहरिस्त है। इनमें राजू कुकरेजा, ललित नागपाल, कालीचरण गौतम प्रमुख हैं। एंटी माफिया अभियान के तहत इन पर कार्रवाई भी हुई है। चंबल में रेत खदान माफिया को उत्तर प्रदेश के अपराधियों का भी संरक्षण है। हरिओम भदौरिया उत्तर प्रदेश के सोनू गौतम गैंग और परमाल तोमर का नजदीकी है रेत कारोबार के साथ अपराधों की साजिश में वांटेड है। राजनीतिक संरक्षण में रेत का अवैध उत्खनन ही मुख्य कारोबार है।
भोपाल संभाग : बिल्डरों की आड़ में भू-माफिया
राजधानी में भाजपा के दो विधायकों के संरक्षण में भू-माफिया ने अपनी जड़ें जमा रखी हैं। यहां गृह निर्माण समितियों की आड़ में करोड़ों की जमीन का हेर-फेर हुआ है। खानूगांव में कांग्रेस के एक विधायक ने बड़े तालाब की जमीन पर कब्जा जमाया है। इन पर गुमटी और पार्किंग माफिया को संरक्षण देने का भी आरोप है। पिछली भाजपा सरकार के मंत्री रहे एक स्थानीय विधायक अपने क्षेत्र के निगरानीशुदा बदमाशों और जुआ-सट्टा संचालित करने वालों को संरक्षण देते हैं। कई बार सार्वजनिक मंच पर अपराधियों के साथ इनकी तस्वीरें वायरल हुई है।
भाजपा के एक पूर्व विधायक और पूर्व जिला अध्यक्ष गुमटी माफिया को संरक्षण देते हैं। सरकारी जमीन पर कब्जा करवाकर झुग्गियां और गुमटियां रखवाने का इन पर आरोप है। इनके संरक्षण में भाजपा नेता बनकर सरकारी जमीनों का घालमेल करने वाले भू-माफिया घनश्याम राजपूत और विजय श्रीवास्तव के खिलाफ मामले दर्ज कर जेल भेजा गया है। भाजपा विधायक विष्णु खत्री का करीबी बैरसिया के पूर्व पार्षद चंचल खत्री ने सरकारी जमीन पर कब्जा करने पर मामला दर्ज हुआ है। पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह और उनके दो करीबी ने चूनाभट्टी में 19 दुकानों पर कब्जा किया था जिसे प्रशासन ने मुक्त करा लिया।
जबलपुर संभाग : माफिया छलनी कर रहा नर्मदा
महाकौशल में नर्मदा से अवैध रेत उत्खनन और शहरों की बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण करना माफिया पर का सबसे बड़ा धंधा है। नरसिंहपुर से भाजपा के बड़े नेता और उनके विधायक भाई के माफिया से संबंध जगजाहिर है। कटनी से भाजपा के एक पूर्व मंत्री और जबलपुर से एक पूर्व महिला विधायक और जबलपुर से वर्तमान मंत्री और बहोरीबंद के एक पूर्व कांग्रेस विधायक का माफिया को संरक्षण देने के मामले सामने आए हैं।
भू-माफिया- जबलपुर से कांग्रेस मंत्री के करीबी शंकर मंछानी पर रेरा में कई मामले दर्ज। लोगों के पैसे नहीं लौटाए। पूर्व में मंछानी भाजपा नेताओं से जुड़े थे।
रेत माफिया- जबलपुर से पूर्व कांग्रेस विधायक के करीबी माने जाने वाले श्रीकांत साहू। बहोरीबंद से पूर्व कांग्रेस विधायक के करीबी अन्नू सिंह, पूर्व भाजपा मंत्री के करीबी पप्पू वाजपेयी।
परिवहन माफिया - भाजपा सांसद के नजदीकी रामरतन पायल कटनी भाजपा जिला अध्यक्ष की ट्रांसपोर्ट कंपनी पर मामला दर्ज।
सूदखोरी माफिया - जबलपुर से भाजपा के पूर्व विधायक के करीबी अज्जू कुरैशी, मनोज सोनकर, राजा सोनकर, टिंकू सोनकर और मंजू चक्रवर्ती।
सागर संभाग : रेत और अतिक्रमण का खेल
सागर संभाग में रेत के अवैध उत्खनन और अतिक्रमण के मामले में माफिया की गहरी जड़ें हैं। छतरपुर में कांग्रेस के विधायक आलोक चतुर्वेदी और सपा नेता चरण सिंह का रेत उत्खनन को लेकर ऑडियो वायरल हुआ था। सागर में भाजपा के एक पूर्व मंत्री की माफिया से नजदीकी है। वहीं, टीकमगढ़ में भाजपा के एक पूर्व विधायक का नाम अवैध उत्खनन से जुड़ता रहा है।
सरकार माफिया के खिलाफ काम कर रही है। ये माफिया पिछले 15 सालों में भाजपा राज में पनपा है। माफिया किसी भी राजनीतिक दल से क्यों न हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। मध्यप्रदेश माफिया के नाम से नहीं जाना जाएगा। अमानक दवा माफिया समाज को नुकसान पहुंचा रहा है, इसके खिलाफ भी सख्ती की जाएगी। माफिया तक संदेश चला गया है। एक परंपरा बन गई थी कि जो करना है करो, अब यह परंपरा समाप्त हो जाएगी।
- कमलनाथ, मुख्यमंत्री
Published on:
09 Jan 2020 07:58 am
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