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कार लेते समय रखें इन बातों का ध्यान, नहीं लगेगी आग

हादसे का कारण बनती है नॉन प्रोटेक्टेड फ्यूल लाइन, वायरिंग जलते ही गेट लॉक कर देती है सेंट्रल लॉकिंग

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भोपाल@रिपोर्ट-प्रवीण मालवीय.

मध्यप्रदेश राजधानी भोपाल के सागर रोड पर बगरौदा चौराहे के पास हाल ही में दो कारों की टक्कर के बाद कारों में आग लग जाने से चार महिला-पुरुषों की दर्दनाक मौतों ने लोगों को दहशत में डाल दिया है वहीं कार मालिकों के मन में कई सवाल भी उठा दिए।

कारों में आग क्यों लगी और ऐसे हालात बनने से कैसे रोका जा सकता है, इसकी जानकारी ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट और मैन्यूफैक्चरर अनमोल बोहरे ने पत्रिका से विशेष बातचीत में दी। सिंगल प्रोटेक्शन फ्यूल लाइन बड़ा खतरा हैचबैक सेगमेंट की एंट्री लेवल कारों में टैंक से इंजन तक की फ्यूल लाइन का प्रोटेक्शन न के बराबर होता है।

कार लेते समय देखें, यदि कार मालिक हैं तो भी कर सकते हैं उपाय

कुछ कारों में तो फ्यूल लाइन गैस पाइप की तरह बिल्कुल खुली होती है। ऐसी ही स्थिति यहां खतरा बनी। कुछ मॉडल्स में फ्यूल पाइप के ऊपर हार्ड प्लेट की सिक्योरिटी रहती हैं वहीं आईसी बेस्ड सेडान कारों में एक्सीडेंट होते ही आईसी सिग्नल भेजकर फ्यूल सप्लाई भी डिस्कनेक्ट कर देती है। विदेशों में ऐसा डबल प्रोटेक्शन अनिवार्य है लेकिन देश में इस मुद्दे को ग्राहकों की जागरूकता पर छोड़ दिया गया है, इसलिए नागरिक खुद इसे देखें।

सेंट्रल लॉकिंग ओवरराइट कराकर बना सकते हैं विकल्प
अधिकांश गाडि़यों में सेंट्रल लॉकिंग की वायरिंग बैटरी के पास या स्टेयरिंग के नीचे होती है जो ड्राइवर साइड से झटका लगते या शार्ट सर्किट होते ही वायरिंग जलने से लॉक हो जाती है। मुम्बई बाढ़ के समय पानी भरने ने कई जानें गईं वहीं इस हादसे में प्रवीण की कार के सामने के दोनों गेट भी वायरिंग जलने से लॉक हो गए।

ग्राहक सेंट्रल लॉकिंग के ऑप्शन के बारे में पता कर लें। कार मालिक सुरक्षा के लिए सेंट्रल लॉकिंग को मैन्यूल ओवरलैप भी करवा सकते हैं। मेन एक्सेस पता करें फिर एक्सपर्टस से एक स्विच लगवा लें जिससे मुसीबत में लॉक होने पर अंदर से मैनुअली भी लॉक्स खोले जा सकें।

यह भी हैं छुपे हुए खतरे

एंट्री लेवल की हैचबैक में हर सिलेंडर पर एक प्लग होता है। यह प्लग बाहर की ओर से लगे होते हैं, एेसे में दुर्घटना की स्थिति में चिंगारी बाहर निकलने की आशंका रहती है जबकि कई सेडान मॉडल्स में प्लग अंदर फिट होकर इंजन के हिस्से की तरह होते हैं जो दुर्घटना की स्थिति में आग लगने से रोकते हैं। इस मामले में डायरेक्ट फ्यूल इंजेक्शन वाली कारें ज्यादा सुरक्षित होती हैं।

एबीएस हैं तो टायर्स का रखें ध्यान

एबीएस और पॉवर स्टेयरिंग को लोग सुरक्षा की गारंटी समझते हैं, लेकिन यह तकनीकें भी दोधारी तलवार है। कार को स्किड होने से रोकने वाला एबीएस टायर घिसे होने की स्थिति में ज्यादा खतरनाक साबित होता है वहीं स्पीड की स्थिति में टर्निंग पर पॉवर स्टेयरिंग का गलत उपयोग भी खतरा बन सकता है।

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