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4000 रैंक वाले स्टूडेंट्स के लिए भी बहुत हैं करियर ऑपशन

सबसे बड़ी मुश्किल है उन स्टूडेंट्स के लिए जिनकी ऑल इंडिया रैंक 4000 से 8000 के बीच है क्योंकि इस इतनी रैंक के कारण या तो उन्हें ईयर ड्रॉप करना पड़ता है या फिर किसी प्राइवेट कॉलेज में भारी डोनेशन देके एडमिशन लेना पड़ता है।

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Alka Jaiswal

Jun 23, 2016

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भोपाल। आईआईटी में एडमिशन शुरू होते ही शहर के टॉप-100 रैंकर्स ने दिल्ली और मुंबई के आईआईटी कॉलेजों में एडमिशन की तैयारी कर ली है। लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल है उन स्टूडेंट्स के लिए जिनकी ऑल इंडिया रैंक 4000 से 8000 के बीच है क्योंकि इस इतनी रैंक के कारण या तो उन्हें ईयर ड्रॉप करना पड़ता है या फिर किसी प्राइवेट कॉलेज में भारी डोनेशन देके एडमिशन लेना पड़ता है।

जब एक्सपर्ट्स से इस समस्या के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि ईयर ड्रॉप करना अच्छा निर्णय नहीं है। ईयर ड्रॉप करने से बेहतर है कि वह नॉन ट्रेडिशनल ब्रांच में एडमिशन ले लें क्योंकि आईआईटी की 11 हज़ार सीटों का इस्तमाल नॉन-ट्रेडिशनल ब्रांच से इंजीनियरिंग करके किया जा सकता है। यह आपको ना ही सिर्फ एक बेहतर अवसर देंगे बल्कि एक बेहतर पैकेज वाली जॉब भी दिला सकते हैं।


कम होगा कॉम्पिटीशन तो ज्यादा मिलेंगे मौके
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अकसर टॉपर्स कोर ब्रांच डिमांड करते हैं जैसे कि सीएस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, कैमिकल, आदि। क्योंकि यह ब्रांच अच्छे पैकेज वाली जॉब देती हैं इसलिए इनकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि 4000 से ज्यादा रैंक वाले स्टूडेंट्स को इन ब्रांच में एडमिशन नहीं मिल पाता है। इसलिए इन ब्रांच के अलावा आप ऑफबीट ब्रांच भी चुन सकते हैं। इन ब्रांच में एडमिशन लेने का ये फायदा होता है कि इन ब्रांच को बहुत ही कम स्टूडेंट्स चुनते हैं जिसके कारण मार्केट में इन स्टूडेंट्स की डिमांड ज्यादा होती है।


माइनिंग इंजीनियरिंग के हैं सिर्फ सात कॉलेज
एक्सपर्ट्स का कहना है कि माइनिंग इंजीनियरिंग एक ऑफबीट ब्रांच है जिसके पूरे देश में सिर्फ 7 कॉलेज हैं। यही कारण है कि इन स्टूडेंट्स की डिमांड ज्यादा है जिससे कि इन्हें काफी अच्छा प्लेसमेंट और पैकेज मिल जाता है।

टीचिंग और रिसर्च में भी है अवसर
अगर आपकी रैंक 4000 से ज्यादा है तो आप ऑफबीट ब्रांच में बीटेक के अलावा इंटिग्रेटेड एमएससी रिसर्च को भी चुन सकते हैं। इस ब्रांच का ऑप्शन आपको कई आईआईटी कॉलेजों में मिल जाएगा। यह आपको रिसर्च और टीचिंग प्रोफेशन की फील्ड में ले जाता है।


अगर रैंक है 5000-10000 के बीच
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप की रैंक 5000-10000 तक है तो आपके लिए साइंटिफिक रिसर्च में जाने का अच्छा अवसर है। अगर आप ब्रांच में कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहते हैं तो आप बीटेक ब्रांच ना मिलने पर एमटेक ब्रांच में एडमिशन ले सकते हैं। दोनों में अंतर ये होता है कि बीटेक 4 साल का और एमटेक 5 साल का कोर्स होता है।

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24 तारीख से होगी आईआईटी-एनआईटी की काउंसलिंग
टॉप 92 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट्स की काउंसलिंग की शुरुआत 24 जून से शुरू हो जाएगी। इन 92 कॉलेजों में 23 आईआईटी कॉलेज, 31 एनआईटी कॉलेज और 20 आईआईआईटी कॉलेज शामिल हैं। हर साल की तरह इस साल भी काउंसलिंग जॉइंट सीट अलोकेशन अथॉरिटी के द्वारा ही कराई जाएगी।

काउंसलिंग का शिड्यूल सभी एनआईटी और आईआईटी कॉलेजों की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। सीट्स के लिए अप्लाई करने के लिए स्टूडेंट्स को ऑनलाइन चॉइस फिल करनी होगी।

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