तीन साल से अपनी और परिवार की संपत्ति का ब्योरा देने में आनाकानी कर रहे नौकरशाहों पर केंद्र सरकार सख्ती करने जा रही है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि प्रदेश के आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसरों को अंतिम मौका दिया जा रहा है। इन्हें 15 अप्रैल से पहले दो साल की संपत्ति का विस्तृत ब्योरा देना होगा। अब इसकी तिथि नहीं बढ़ाई जाएगी। ज्ञात रहे कि प्रदेश के कई नौकरशाह विरोध कर रहे थे।
कर रहे थे विरोध
प्रदेश की आईएएस एसोसिएशन की तत्कालीन अध्यक्ष अरुणा शर्मा ने केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर विरोध किया था। दिल्ली से आए डीओपीटी अफसर के सामने भी प्रदेश के आला अफसरों ने संपत्ति का ब्यौरा देने का विरोध जताया था। यह अफसर अधिकारियों को बताने आए थे कि किस तरह प्रोफार्मा में जानकारी देना है। बैठक में प्रमुख सचिव वाणिज्यकर विभाग मनोज श्रीवास्तव ने तो यहां तक कह दिया था कि पत्नी को मायके से गिफ्ट मिला है तो वह नहीं बताना चाहती है। विरोध के चलते अफसरों को इसमें संशोधन की उम्मीद थी। अधिनियम से पत्नी, बच्चों और आश्रितों की संपत्ति के विवरण के कालम को हटाया जा सकता है लेकिन केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी थी, इसमें कोई संशोधन नहीं होना है। इस कारण कुछ अफसरों ने ब्यौरा जमा कर दिया था। इसका एक तय प्रोफार्मा है।
कई बार बढ़ी तारीख
केंद्र सरकार ने नौकरशाहों की संपत्ति सार्वजनिक करने के लिए लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 लागू किया था। 26 दिसंबर-14 में नोटिफिकेशन जारी किया था। उसी साल से इसे लागू कर दिया था। लेकिन तब से कई बार इसकी तारीख बढ़ चुकी है, लेकिन आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसर परिजनों की सपंत्ति का ब्यौरा देने में आनाकानी कर रहे थे। केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने भोपाल में आकर अफसरों को संपत्ति का फार्म भरने की ट्रेनिंग भी दी थी।
इसका था विरोध
पत्नी की संपत्ति, उसे मिलने वाले गिफ्ट, मायके से मिली संपत्ति की जानकारी, बच्चों के नाम की संपत्ति, अन्य आश्रितों के नाम की संपत्ति।
यह जानकारी देनी है
सोना, चांदी, डायमंड, महंगे फर्नीचर, एंटिक आयटम, पेंटिंग, इलेक्ट्रानिक्स आयटम, नकदी, इंश्योरेंस, शेयर, बॉन्ड्स, म्युचूअल फंड, पेंशन स्कीम योजना, पर्सनल लोन, एक लाख रुपए से ज्यादा एडवांस लेना या देना, वाहन, प्रॉपर्टी आदि।