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केन्द्र से अब तक नहीं मिली बाढ़ प्रभावितों को मदद, भेजा था 6621.28 करोड़ का प्रस्ताव

राज्य सरकार ने अपने खजाने से प्रभावित परिवारों को दी 200 करोड़ की सहायता फसल राहत मद में 270 करोड़ वितरित

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Heavy Rain: बारिश से आफत: कर्ज लेकर लगाई फसल, मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं मिली

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केन्द्र और राज्य में अलग—अलग सरकार होने का खामियाजा अति बारिश प्रभावितों को भुगतना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रस्ताव मिलने के बावजूद केन्द्र ने अब तक प्रभावित परिवारों को किसी तरह की कोई मदद राशि जारी नहीं की है। इधर, आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने अब तक 200 करोड रुपए बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए जारी किए हैं। लेकिन जितना नुकसान हुआ है उसकी तुलना में यह राशि उंट के मुंह में जीरे के समान है।
अति-वृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित जिलों मंदसौर, आगर और नीमच में किसान प्रभावित हुए हैं। इनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। हालांकि राज्य सरकार इन्हें राहत देने के लिए कुछ राशि दे रही है, लेकिन इससे किसानों का रोष बढ़ रहा है। सरकार ने इन जिलों में फसल राहत मद में अब तक 270 करोड़ की राशि का वितरण किए हैं।

राजस्व मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि भारी बारिश के दौरान राज्य सरकार द्वारा सभी एजेंसियों से मदद लेकर लगभग 75 हजार लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। सभी जिलों में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। राहत के प्रकरण भी तैयार किये जा रहे हैं।

अति-वृष्टि और बाढ़ से हुई क्षति के विरुद्ध राहत वितरण और क्षतिग्रस्त भौतिक अधोसंरचनाओं की मरम्मत, पुनर्निर्माण और निर्माण आदि के लिये राज्य सरकार द्वारा तेज गति से काम कर रही है। अक्टूबर में ही भारत सरकार से एनडीआरएफ से 6621 करोड़ 28 लाख अतिरिक्त राशि की माँग की गई है। वर्ष 2013, 2015 और 2017 में बाढ़ तथा सूखा पड़ने पर भारत सरकार को सहायता का मेमोरेण्डम नवम्बर महीने तक ही गया था। केन्द्र सरकार का अध्ययन दल 21 जिलों में दौरा कर अति-वृष्टि की तबाही देख चुका है।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने स्वयं प्रधानमंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री से मिलकर राज्य को जल्दी सहायता राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को अभी तक कोई सहायता राशि एनडीआरएफ के तहत नहीं दी गई है, जबकि कर्नाटक और बिहार को सहायता राशि दी जा चुकी है।