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बिना मैकेनिक चल रही थी निगम की केंद्रीय कर्मशाला, कार्रवाई में खुली भ्रष्टाचार की पोल

नगर निगम की केन्द्रीय कर्मशाला (वर्कशॉप) 20 साल से बिना मैकेनिक के चल रही थी।

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भोपाल। नगर निगम की केन्द्रीय कर्मशाला (वर्कशॉप) 20 साल से बिना मैकेनिक के चल रही थी। पिछले दिनों तत्कालीन निगम आयुक्त छवि भारद्वाज की छापामार कार्रवाई में भ्रष्टाचार के साथ ही अव्यवस्थों की भी पोल खुली। इसके बाद अब सुधार की दिशा में काम किया जा रहा है।

मैकेनिक मिल सके इसके लिए कर्मचारियों को आईटीआई का प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें बतौर मैकेनिक पदोन्नत किया जाएगा। दरअसल, निगम की कर्मशाला में एक भी प्रशिक्षित मैकेनिक नहीं है, जो काम कर रहे हैं वे महज अनुभव के आधार पर रखे गए हैं। एेसे में जो लोग बतौर मैकेनिक काम कर रहे उन्हें सहायक जैसे गैरतकनीकी पद पर रखा गया है। एेसे में इनको अपने काम के मुताबिक वेतन भी नहीं मिल पाता है। जब छवि भारद्वाज ने कर्मशाला में मैकेनिकों से बात की तब मैकेनिकों ने उन्हें असल स्थिति से अवगत कराया था। इसके बाद भारद्वाज ने आईटीआई का प्रशिक्षण दिलाने और बतौर मैकेनिक पदोन्नति दिलाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकारियों को आदेशित किया।

कभी थे 8 मैकेनिक

केन्द्रीय कर्मशाला में नौकरी कर चुके मैकेनिक की मानें तो करीब २० साल पहले मैकेनिकों के आठ पद थे। जैसे-जैसे मैकेनिक सेवानिवृत्त हुए इन पदों को भी खत्म कर दिया गया। निगम के पास महज दो फिटर ट्रेड का प्रशिक्षण प्र्राप्त मैकेनिक शमीम और अस्लम थे। अस्लम २०१५ में सेवानिवृत्त हो गए जबकि शमीम भ्रष्टाचार के आरोप में संस्पेंड हुए।

भ्रष्टाचार की वजह!

केन्द्रीय कर्मशाला में पिछले कुछ सालों में सैकड़ों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। इसके पीछे नियमित मैकेनिक नहीं होना भी वजह माना जा रहा है। २५ और ८९ दिवसीय मैकेनिकों को वेतन सात से 10 हजार रुपए मिलते हैं। वेतन कम होने के साथ ही इन लोगों को नौकरी जाने का डर भी नहीं होता है, एेसे में ये लोग मनमानी करते हैं।

* मैकेनिकों को आईटीआई का प्रशिक्षण दिलाकर पदोन्नति दी जाएगी। इसके लिए प्रकिया शुरू की जा रही है। इससे मैकेनिकों को लाभ मिलेगा और उनका मनोबल बढ़ेगा।

- राहुल सिंह राजपूत, उपायुक्त, ननि