
जनता ने तय किए नरेला विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे
भोपाल। पत्रिका समूह के जन एजेंडा 2018-23 के तहत नरेला विधानसभा क्षेत्र के लोगों, जन संगठनों और समूहों ने बैठक कर रोड मैप तैयार किया। क्षेत्र के विकास के मुद्दे तय किए।
अतिक्रमण: क्षेत्र की यह सबसे बड़ी समस्या है। जिसकी जहां मर्जी हुई वहां पर कब्जा कर लिया, कोई देखने वाला नहीं। अतिक्रमण ने सड़कों को संकरा कर दिया है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी होती है। शिकायत के बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार कार्रवाई नहीं करते हैं।
अवैध कॉलोनियां: सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां हैं। इनसे नगर निगम टैक्स तो ले रहा है, लेकिन कोई सुविधा नहीं दे रहा है। जनता का रहना मुहाल हो चला है।
पेयजल: क्षेत्र में पेजयल सप्लाई के लिए नर्मदा की पाइपलाइन डाली गई, लेकिन सभी जगह पानी नहीं पहुंच पाया है। बस्तियों में लोग 12 महीने टैंकर के भरोसे हैं।
सड़कें: कॉलोनियों के अंदर की सड़कें नहीं बन पाई हैं। पाइपलाइन डालने सड़कों की खुदाई की गई, लेकिन रेस्टोरेशन नहीं हुआ। बारिश के बाद सड़कें और भी बदतर हो गई हैं।
बुनियादी सुविधाएं: विकसित कॉलोनियों का निगम को हस्तांतरण नहीं हो पाया। रहवासियों को नगर निगम बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं करा पाया है। कई क्षेत्रों में पेयजल का भीषण संकट है।
सीवेज: क्षेत्र में सीवेज लाइन नहीं बिछ पाने के कारण इसे नालों में मिला दिया जाता है। बीमारियां फैलने की आशंका है। रहवासी बदबू से परेशान हैं।
कानून व्यवस्था: क्षेत्र में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। रहवासी राजनीतिक संरक्षण को इसका जिम्मेदार बताते हैं। गुंडे अड़ीबाजी, लूट, छेड़छाड़ की घटनाएं अंजाम दे रहे हैं।
शैक्षणिक संस्थान: क्षेत्र में कोई भी स्तरीय स्कूल-कॉलेज नहीं है। इससे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है। बेतरीब ट्रैफिक भी रहवासियों के लिए आफत बना हुआ है।
स्वास्थ्य सुविधाएं: यहां बड़ा अस्पताल नहीं है। अधिकांश आबादी जेपी जिला अस्पताल या हमीदिया इलाज के लिए जाती है। प्रसव के लिए सुल्तानिया जनाना अस्पताल या निजी अस्पतालों की की ओर रुख करना पड़ता है।
पार्किंग: क्षेत्र में बाजार तो विकसित हो गए, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर पार्क किए जाने वाले वाहनों के कारण आवाजाही में भी दिक्कत होती है।
इधर, ये बोली जनता:
पेंशनर्स बोले... सरकारों ने नहीं रखा हमारा ध्यान, बेहतर मेडिकल सुविधाओं के लिए भटक रहे
तय कर लिया... जो पार्टी और प्रत्याशी हमारा रखेंगे ख्याल, इस बार उसे ही मिलेगा समर्थन...
जो ख्याल रखेगा हम उसे ही देंगे वोट
अभी तक पेंशनरों के साथ अन्याय होता आया है। न मेडिकल की सुविधा है, न ही गंभीर बीमारी में सरकार मदद देती है। 32 माह का एरियर अभी तक नहीं दिया है। घोषणाएं तो होती हैं, पर पूरी नहीं की जातीं, इसलिए अब जो हमारा ख्याल रखेगा, हम उसे ही देंगे वोट।
- गणेशदत्त जोशी, सह्याद्रि परिसर, डिपो चौराहा
नेता की कथनी और करनी में न हो अंतर
चुनाव में जनप्रतिनिधि घर आकर वरिष्ठ नागरिकों का आशीर्वाद लेते हंै, लेकिन जीतने के बाद हमें भूल जाते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को ही अपनी समस्याओं का समाधान कराने उन्हें ढूंढऩा पड़ता है। इसलिए एेसा जनप्रतिनिधि हो, जिसकी कथनी और करनी में कोई अंतर न हो।
- एलएन कैलासिया, साउथ टीटी नगर
गरीबी रेखा वालों जैसी हमें भी मिलें सुविधाएं
सरकारों को गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों जैसी सुविधाएं पेंशनरों को भी देनी चाहिए। कोई उम्मीदवार पेंशनरों के अधिकारों को लेकर बात करता नजर नहीं आता, जबकि वरिष्ठजन समाज की धरोहर हैं। जो हमारे अधिकारों के लिए लड़ेगा, उसे ही हम तवज्जो देंगे।
- एनआर शर्मा, अवधपुरी, भेल
हमारी समस्याओं का नहीं होता निराकरण
अब तक पेंशनरों के लिए घोषणाएं बहुत हुर्इं। पेंशन कल्याण बोर्ड बनाया, लेकिन गठन नहीं हुआ, सरकारंे चाहती ही नहीं है कि हमारी समस्याओं का निराकरण हो। ऐसे में हम भी क्यों सोचंे उनके लिए। हमें पार्टी से कोई मतलब नहीं, जो हमारे साथ, हम उनके साथ।
- सुरेन्द्र शुक्ला, आशीर्वाद कॉलोनी, कोलार
योजनाएं ऐसी बनें जो अमल में आ सकें
बुजुर्गों की सुरक्षा पुलिस के जिम्मे है। व्यवस्था की गई थी कि पुलिसवाले सीनियर सिटीजन से मिलंे, समस्याएं जानें, लेकिन यह नहीं हो पाता है। हर विभाग में अमले की कमी है, इसलिए कोई भी योजना बनाते समय जरूरी है कि उसे अमल में कैसे लाया जाएगा, इसकी रणनीति बने।
- मधुसूदन रावत, नारायण नगर, होशंगाबाद रोड
घोषणा-पत्र में शामिल हों पेंशनरों की मांगें
पेंशनरों की कई समस्याएं हैं। समाधान के लिए घोषणाएं खूब होती हंै, लेकिन हकीकत नहीं बन पातीं। हमारी कई मांगंे लंबित हैं। हम चाहते हैं कि जो उम्मीदवार हमारे बीच आएगा, हमारी मांगों को गौर से सुनेगा, उन्हें अपनी घोषणा-पत्र में शामिल करेगा, हम उसका साथ देंगे।
- शैलेंद्र श्रीवास्तव, पुष्पा नगर
जो व्यवस्था बदलेगा हम उसके साथ हैं
बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक जरूरी हैं मेडिकल सुविधाएं। फिर भी दवाओं के लिए हर माह अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जो दवाएं मिलती हैं, वह भी ब्रांडेड नहीं होतीं, बाजार से खरीदना पड़ती हंै। मेडिकल सुविधाओं में जो उम्मीदवार सुधार करेगा, उसे ही वोट देंगे।
- प्रकाश गवांदे, बीमाकुंज, कोलार
पेंशनर्स को बोझ न समझे सरकार
आजकल परिवार पेंशनर को बोझ समझते हैं। सरकारों का रवैया भी पेंशनरों के प्रति ठीक नहीं है। समस्याओं के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आना चाहता। वरिष्ठजनों को जो भी सम्मान के साथ उनके अधिकारों के लिए काम करेगा, हम उसका समर्थन करेंगे।
- अंबिका प्रसाद रावत, अंजनी कॉम्प्लेक्स, तुलसी नगर
Published on:
15 Oct 2018 12:39 pm
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