
भोपाल। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बुधवार को राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट स्थित समन्वय भवन में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अब्दुल कादिर इंदौरी ने अपने संघर्षों की कहानी बतायी, उन्होंने कहा कि मेरे दोनों हाथ नहीं हैं इस बात को लेकर उन्होंने अपनी मौसी से पूछा जिसके दोनों हाथ नहीं हो, इसके लिए सबसे कठिन काम कौन सा है.. मौसी ने बोला दोनों हाथ नहीं उसके लिये तैरना मुश्किल है। उन्होंने सबसे पहले तैरना सीखा।
कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम पर लोगों जागरूक किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने किशोर न्याय और पोक्सो कानून के विषय पर भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विश्वास सारंग, महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस, प्रदेशभर से बालक-बालिका, प्रतिनिधि, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सहित शिक्षा से जुड़े व्यक्ति और बालकों के हित में काम करने वाली समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।
असहज महसूस कर रहे बच्चें कर सकते हैं शिकायत
स्कूली बच्चे अगर स्कूल, घर परिवार अथवा आसपास अपने आप को असहज महसूस कर रहे हैं, तो वे इसकी शिकायत बाल आयोग को पोस्टकार्ड लिखकर कर सकते हैं। बच्चों की शिकायतों को गंभीरतापूर्वक लेते हुए आयोग इसे सुलझाने के लिए प्रयास करेगा, साथ ही अगर कोई सुझाव भी देना चाहते हैं, तो उन सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।
नर्सरी, प्रायमरी के बच्चे कैसे करेंगे शिकायत
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के लिए नर्सरी, आंगनवाड़ी, प्रायमरी के बच्चे पहली प्राथमिकता है, लेकिन इस अभियान का लाभ बच्चे कैसे उठा पाएंगे। नर्सरी, प्रायमरी के अधिकांश बच्चे पोस्टकार्ड पर अपने मन की बात लिख नहीं सकते हैं, एेसे में आयोग के इस अभियान का क्या हश्र होगा, यह कह पाना मुश्किल है। सरकार बच्चों के भविष्य अच्छे भविष्य के लिए नयी योजनाएं बना रही है।
Published on:
28 Mar 2018 12:35 pm
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