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सावधान! मानसिक रूप से विकलांग पैदा हो रहे इस बड़े शहर के बच्चे

चिंगारी ट्रस्ट विकलांग बच्चों के इलाज में सक्रिय, तीसरी पीढ़ी में गैस कांड का असर, बच्चों में दिखी मानसिक विकलांगता

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तीसरी पीढ़ी में गैस कांड का असर

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सन 1984 में गैस रिसी थी जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे. करीब 4 दशक पुराने इस हादसे का असर अभी भी दिखाई दे रहा है. भोपाल गैस त्रासदी को विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना के रूप में जाना जाता है जिसका असर तीसरी पीढ़ी में भी नजर आ रहा है। यहां कई बच्चे मानसिक रूप से विकलांग पैदा हो रहे हैं.

ऐसे विकलांग बच्चों के इलाज में चिंगारी ट्रस्ट सक्रिय है. चिंगारी ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि ऐसे कई बच्चों में मानसिक विकलांगता सामने आ रही है जिनके माता-पिता गैस पीडि़त हैं। गैस कांड के कारण दूसरी और तीसरी पीढ़ी के जन्मजात विकलांग बच्चों के पुनर्वास के लिए यह ट्रस्ट काम कर रहा है। सालों से परेशान ऐसे बच्चों का इलाज कई थैरेपियों के जरिए संभव हो सका है।

ट्रस्ट की रशीदा बी ने बताया कि 1204 बच्चे पंजीकृत हैं जिनमें से 180- 190 बच्चे रोज आते हैं। फिजियरी ऑक्यूपेशन थेरेपी स्पीच थेरेपी, विशेष शिक्षा आहार दवाइयां , संगीत, खेलकूद सहित कई गतिविधियां कराई जा रही हैं। बच्चों को इसका फायदा मिला है। नौशीन खान (स्पीच पेरेपिस्ट) ने बताया रोजाना 125 से 130 बच्चे स्पीच थैरेपी प्राप्त करते हैं।

नेशनल गेम्स तक पहुंचे बच्चे
खेलकूद विभाग से अभिषेक पांडेय ने बताया कि यहां के 7 बच्चे अलग-अलग नेशनल गेम्स के लिए गुजरात, मंबी पॉडीचेरी गए थे। यहां तीनों बच्चियां दिसंबर 2022 में होने वाली फाइनल बास्केटबॉल नेशनल केप के लिए गुजरात में भाग लेने के लिए जा रही है। गैस पीडि़तों के लिए काम कर रहीं 15 साल की जेहरा सेरिब्रल पाल्सी से पीडि़त है। इनकी मां नुसरत ने बताया पहले न यह चल पाती थीं और न ही बोल पाती थीं। देखकर रोना आता था। ट्रस्ट में एक्सराइज और और एजुकेशन दी जा रही है। पांच साल का दैविक भी खाना पीना नहीं पाता था नहीं शब्द निकलते थे। इनकी मांग ने बताया इलाज की पूरी कोशिश में है।