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भोपाल। राजधानी सहित आसपास के जिलों के कई सरकारी स्कूलों में बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। बिना इनके बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। दरअसल योजना के तहत निशुल्क किताबों का वितरण अब तक नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार हर साल पहली से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूलों के माध्यम से निशुल्क किताबें दी जाती हैं। शहर के बाहरी हिस्से और ग्रामीण क्षेत्रों तक ये अभी पहुंची ही नहीं है। यहां पहुंचने पर पता लगा कि किसी के पास पुरानी किताबें हैं तो कोई खाली बस्ता लेकर ही स्कूल पहुंच रहा है। राजधानी में करीब 1200 सरकारी स्कूल हैं। इन तक किताबों को पहुंचाने संकुल स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है।
निजी वाहनों का उपयोग आनन-फानन में तैयारी
प्रदेश के स्कूलों में पाठ्यपुस्तक निगम के जरिए किताबें दी जाती है। मुख्यालय से जिला स्तर पर बने डिपो में इन्हें भेजा जाता है। उसके बाद संकुल स्तर और फिर स्कूलों में बच्चों तक भेजा रहा है। स्कूलों में जब किताबें नहीं आई तो कई जिलों से शिक्षक अपने वाहन लेकर राजधानी आ रहे हैं। यहां से किताबें भरकर ले जाई जा रही हैं।
अधिकारी बोले-पहुंचा दी पुस्तकें
मामले में जिला स्तर पर कोई जिम्मेदारी लेने तैयार नहीं है। पुस्तक निगम के जिम्मेदारों ने बताया कि डिपो तक किताबें जा चुकी हैं। स्कूलों से बच्चों को इनका वितरण होगा।
पुरानी किताबों को जमा करने की योजना ठप
पुरानी किताबों को जमा करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने लाइब्रेरी की योजना बनाई थी। शिक्षकों ने स्कूलों में इन्हें जुटाया भी था। लेकिन लाइब्रेरी नहीं बन पाई। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा से दी गई थी। इसके बाद संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) ने निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में कहा गया है कि कक्षा नौवीं के सभी विद्यार्थियों को दसवीं में प्रवेश दिया जाए। साथ ही विद्यार्थी अपने साथ पुरानी किताबें लेकर आएं और स्कूल में जमा कराएं। नई पाठ्यपुस्तकें प्राप्त होने तक पुरानी पुस्तकें विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के अनुसार वितरित की जाएंगी।
जिलों के हाल
राजधानी में करीब 1200 स्कूल हैं जिनमें 25 हजार से ज्यादा बच्चे दर्ज हैं। पंजीयन के साथ इनकी संख्या बढ़ रही है। 15 जून से सरकारी स्कूल में कक्षाएं शुरू हो गई थी। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के मुताबिक इसी समय से बच्चों को किताबें दी जाना थी। जानकारों ने बताया कुछ जगह तो यह पहुंची लेकिन अधिकांश स्कूलों में डेढ़ माह भी बच्चों को किताबों का इंतजार है।
Published on:
01 Aug 2022 04:08 pm
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