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बच्चों को याद नहीं राजकीय गान, मछली-खेल भी भूले

एमपी में राजकीय प्रतीकों MP's state symbol की समृद्ध श्रृंखला लेकिन साज—सज्जा के प्रयास महज कागजों पर, राजकीय प्रतीकों की शान में गुस्ताखी, मछली, खेल गीत सब बिसराए, विशेषज्ञ बोले- जिनका अस्तित्व बचा है, उसमें प्रकृति का ‘हाथ’

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रूपेश मिश्रा, भोपाल. मध्यप्रदेश में राजकीय प्रतीकों MP's state symbol की समृद्ध श्रंखला है, लेकिन साज-संभाल के अभाव में लगभग सभी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश की पहचान, गौरव और इतिहास को अमिट बनाने के लिए यहां 13 राजकीय प्रतीकों को अपनाया गया था। टाइगर ऑफ वाटर के नाम से मशहूर महाशीर मछली को राजकीय मछली का दर्जा मिला तो मलखंब को राजकीय खेल। सुख का गाता, सब का साथी... को राजकीय गीत state anthem of mp का दर्जा दिया गया, लेकिन बाद में ऐसे बिसराया कि सभी प्रतीक कागजों में कैद होकर रह गए। हाल ये है कि आज महाशीर मछली विलुप्ति की कगार पर है। मलखंभ अपनी पहचान ही नहीं बना पाया। राजकीय गीत state anthem of mp से तो अब प्रदेश के बच्चे भी वाकिफ नहीं हैं। बस सुकून इतना है कि राजकीय पेड़ वटवृक्ष और पक्षी दूधराज की स्थिति बेहतर है, लेकिन इसके पीछे वजह इनके प्राकृतिक ढांचे की मजबूती और प्रकृति ही है।

मलखंब: कागजों में सिमट गई अकादमी
प्रदेश में हाल ही में मलखंब के करीब 14 प्रशिक्षण केन्द्र खोले गए थे, लेकिन इनमें से कुछ बंद हो गए। कारण- प्रशिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय नहीं मिलना है। वर्ष 2007 व 2012 में सरकार ने राज्य स्तरीय अकादमी बनाने की घोषणा की थी, जो अभी कागजों में ही है।

महाशीर पर प्रदूषित नदियों ने लाया संकट
महाशीर मछली का अस्तित्व बचाने के लिए कई वर्षों से काम कर रहीं डॉ. श्रीपर्णा सक्सेना ने बताया, पहले 100 में 26 मछलियां महाशीर होती थीं, लेकिन अब सिर्फ 1 प्रतिशत ही बची हैं। इसके पीछे नदियों का प्रदूषित होना सबसे प्रमुख कारण है, क्योंकि महाशीर साफ-सुथरे पानी में रह पाती है।

गीत: सरकार के कार्यक्रमों तक ही
प्रदेश के गौरव का बखान करता यह गीत सरकारी कार्यक्रमों और कुछ स्कूलों तक सिमटकर रह गया। इसे लिखने वाले महेश श्रीवास्तव का कहना है, आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है। मप्र बाल आयोग के पूर्व अध्यक्ष बृजेश सिंह चौहान ने कहा, स्कूलों में कड़ाई से पालन कराएंगे।

खेल प्राथमिकता में
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक रवि गुप्ता ने कहा, अकादमी खोलने के लिए विचार किया जा रहा है। मलखंब हमारी प्राथमिकता में है। जो तीन सेंटर बंद होने की जानकारी मिली है, उसके बारे में पता करवाता हूं।

निगरानी संभव नहीं
डीपीआइ आयुक्त अभय वर्मा ने कहा कि अगर किसी स्कूल में मध्यप्रदेश गान नहीं हो रहा है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। जहां तक सवाल निगरानी रखने का है कि तो सभी स्कूल पर निगरानी रख पाना संभव नहीं है।

हैचरी सेंटर खोल रहे
मत्स्य उद्योग विभाग के प्रभारी संचालक भरत सिंह ने बताया, महाशीर मछली के संरक्षण के लिए प्रयास हो रहे हैं। प्रदेश का पहला महाशीर मछली का हैचरी सेंटर खोला जा रहा है। इसके लिए 1.49 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बनाकर दिया है।