
चीन से भारत को बेहतर बनाने समझी चीन की विकास की कहानी
भोपाल। सिविल सर्विसेस क्लब ने रविवार को द चाइना समिट का आयोजन किया गया। इस समिट में शहर के 80 कॉलेज स्टूडेंट्स ने चीन के अलग-अलग पक्षों पर तीन घंटे तक अपनी बात रखी। इस समिट का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक चीन के विकास के पीछे की कहानी समझाना था। इसकी थीम भारत को बेहतर बनाने के लिए हम चीन से क्या सीख सकते हैं थी।
समिट में 10 विषयों पर चर्चा हुई। जिनमें 1949 के बाद चीन का इतिहास, चीन के संसाधन, चीन की संवैधानिक/प्रशासनिक व्यवस्था, चीन की रक्षा व्यवस्था व रक्षा नीति, चीन की शिक्षा व्यवस्था वे खेल नीति, चीन में अर्बन प्लानिंग (शहरों का प्रबंधन), चीन की मैनुफेक्चरिंग एन्ड एक्सपोर्ट पॉलिसी, चीन की मेरीटाइम पॉलिसी (समुद्र की नीति), बॉर्डर एन्ड रोड इनिशिएटिव, चाइनीज डायस्पोरा (चीनी मूल के व्यक्ति) जैसे मुद्दे प्रमुख थे।
राजवंश किंग से बना चीन शब्द
समिट में प्रतिभागियों को पता चला कि चीन राज करने वाले एक राजवंश किंग के नाम से चीन शब्द बना है। मंगोलिया से ज्यादा मंगोल चीन में रहते हैं। चीन की 94 प्रतिशत जनसंख्या चीन के पूर्वी तट पर रहती है, भारत से लगने वाला चीन का ज़्यादातर हिस्सा वीरान है। मंचूरिया जिसे हम खाने की एक डिश के रूप में जानते हैं, असल में चीन का एक बड़ा राज्य है। हांग-कांग 199 में चीन में शामिल हो गया था पर आज भी हांग-कांग का अलग पासपोर्ट है।
चीन में हर नागरिक के पास काम पाने का मौलिक अधिकार है। टेबिल टेनिस को चीन में पिंग पोंग कहते हैं । ये उनका राष्ट्रीय खेल भी है । चीन के लोग टेबिल टेनिस को कूटनीति में भी जमकर इस्तेमाल करते हैं जिसे पिंग पोंग डिप्लोमेसी कहा जाता है। वहीं प्रतिभागियों ने बताया कि चीन में 2000 से ज्यादा स्पोट्र्स स्कूल हैं जिनमे 6 वर्ष की उम्र में बच्चों को प्रवेश दिया जाता है । इन स्कूलों के बच्चे ही चीन के 90 प्रतिशत से ज्यादा ओलंपिक मेडल जीतते हैं। चीन के हर नागरिक को 9 साल की बेसिक शिक्षा लेना जरूरी है । जो सरकार द्वारा नि:शुल्क दी जाती है पर सबके लिए कंपलसरी है।
Updated on:
24 Sep 2018, 11:17 AM IST
Published on:
24 Sep 2018, 11:17 AM IST
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