
भोपाल। नवाबी दौर में शहर के कई हिस्सों में बड़े बड़े दरवाजे बनवाए गए थे। इनमें से ज्यादातर तो अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए जो बाकी बचे हैं उनकी हालत खराब हैं। पहले कभी शहर के हर हिस्से में एक बड़ा दरवाजा हुआ करता था। वर्तमान में जुमेराती और शाहजहांनाबाद में ये बाकी बचे हैं। जबकि पीरगेट का केवल नाम रह गया हैं। इसके बाद भी बचे हुए ऐतिहासिक दरवाजों को बचाने प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। ये हाल उस समय है सदर मंजिल सहित अन्य धरोहरों को सहेजने लाखों रुपए खर्च करने की बात कही जा रही है।
ये कैसा पार्क, न हरियाली न ही कोई सुरक्षा
शहर में कुछ पार्क पर जहां लाखों रुपए खर्च किया जा रहा है वहीं कुछ ऐसे हैं जिनकी ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं। सिक्योरिटी लाइन स्थित स्कूल के पास के पार्क में न हरियाली बाकी रही और न ही कोई इंतजाम। हालात ये हैं कि पार्क में प्रवेश द्वार तक गायब है। ऐसे में ये असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। इसमें सुधार को लेकर कई बार मांग की जा चुकी है। लेकिन अब तक कोई काम नहीं कराया गया।
शोध के लिए मुहैया कराई जाए सुविधाएं
राजधानी में ऐसे कई विद्यार्थी हैं जो अलग-अलग विषयों में पीएचडी कर रहे हैं। कुछ संस्थानों में तो शोध के लिए पर्याप्त सुविधा है लेकिन ज्यादातर इसकी कमी झेल रहे हैं। इसका सीधा असर शोधार्थी पर पड़ रहा है। अगर अच्छी पठन सामग्री मिलेगी तभी शोध पर बेहतर काम हो सकता है। इसके अलावा पीएचडी में प्रवेश को लेकर पिछले कुछ सालों में परिवर्तन किए गए। कई विद्यार्थियों ने इनमें बदलाव की मांग की है। इस ओर शासन को विचार करना चाहिए। ये मामला उन हजारों विद्यार्थियों से जुड़ा है जो पीएचडी करना चाहते हैं है जो पीएचडी करना चाहते हैं।
Published on:
20 Apr 2018 09:18 pm
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