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सीएम हेल्पलाइन: अफसरों की सुस्ती के आगे कमजोर पड़ता जनता का भरोसा, सिर्फ आंकड़ों में राहत, सिस्टम से अपग्रेड हो जाती हैं शिकायतें, हल नहीं होतीं

सीएम हेल्पलाइन: अफसरों की सुस्ती के आगे कमजोर पड़ता जनता का भरोसा, सिर्फ आंकड़ों में राहत, सिस्टम से अपग्रेड हो जाती हैं शिकायतें, हल नहीं होतीं - 100 दिन से ज्यादा समय वाली 3189 शिकायतों का निराकरण ही नहीं कर पा रहे अफसर, ज्यादातर एल-4 पर अटकीं- 300 दिन से ज्यादा समय वाली 666 शिकायतें, इनमें से कई शिकायत बार-बार आ रही हैं, शिकायतकर्ता असंतुष्ट

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सीएम हेल्पलाइन: अफसरों की सुस्ती के आगे कमजोर पड़ता जनता का भरोसा, सिर्फ आंकड़ों में राहत, सिस्टम से अपग्रेड हो जाती हैं शिकायतें, हल नहीं होतीं

सीएम हेल्पलाइन: अफसरों की सुस्ती के आगे कमजोर पड़ता जनता का भरोसा, सिर्फ आंकड़ों में राहत, सिस्टम से अपग्रेड हो जाती हैं शिकायतें, हल नहीं होतीं

भोपाल. कोरोना काल में बंद पड़ी जनसुनवाई के बाद जनता का आखिरी भरोसा सीएम हेल्पलाइन अफसरों की सुस्ती के आगे कमजोर पड़ती जा रही है। यहां सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी होती है। शिकायत अपग्रेड होती जाती है, समाधान का प्रतिशत काफी कम रहता है। यही वजह है कि 5 अगस्त 2021 की स्थिति में भोपाल के 197 विभागों/ उप विभागों की 8455 शिकायतें अलग-अलग विभागों में लंबित हैं। एल-1 से ज्यादा शिकायतें एल-4 पर आकर लंबित हो जाती हैं। शिकायतकर्ता इस आश्वासन पर बैठा रहता है कि उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। निराकरण जरूर होता, लेकिन यहां सिस्टम की बाजीगरी में उलझी शिकायतें सिर्फ आंकड़ा बढ़ाती रहती हैं। अगर कोई शिकायतकर्ता असंतुष्ठ है और बार-बार शिकायतें कर रहा है तो उसकी शिकायत अगले 100 और 300 दिन की लंबित सूची में डालकर इतिश्री कर ली जाती है।

राजधानी में शिकायतों को लेकर विभागों की स्थिति बदलती रहती है। कभी ऊर्जा विभाग टॉप पर रहता है तो कभी राजस्व विभाग। कोरोना काल में चिकित्सा शिक्षा, यहां तक की सुल्तानिया अस्पताल की शिकायत भी सीएम हेल्पलाइन पहुंची है। पोर्टल पर की गई पड़ताल में भोपाल की शिकायतों में एल-1 पर आईं शिकायतों के बाद एल-2,एल-3 स्तर पर तेजी से शिकायत दौड़ती है। लेकिन एल-4 पर आकर मामला अटक जाता है।

300 दिन लंबित शिकायतों में सबसे ज्यादा स्कूल की
सीएम हेल्पलाइन में सबसे अधिक 300 दिनों तक पेंडिंग 666 शिकायतों में सबसे ज्यादा स्कूल शिक्षा विभाग की शिकायतें हैं। अधिकांश शिकायतें फीस अधिक लेने के संबंध में की गईं हैं। इसके बाद राजस्व विभाग की 126 और चिकित्सा शिक्षा विभाग की 91 शिकायतें हैं। जिनका निराकरण 300 दिन बाद भी नहीं हो सका है।

100 दिन लंबित शिकायतों में सबसे ज्यादा राजस्व की

इस समय सीमा में सबसे ज्यादा 669 शिकायतें राजस्व विभाग की है। स्कूल शिक्षा विभाग की 449 शिकायतें हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग की 349 शिकायतें लंबित हैं। जो एल-4 स्तर पर जाकर अटकी हुईं हैं। सबसे कम शिकायत सामाजिक न्याय विभाग की है।

5 अगस्त तक लंबित शिकायतों की स्थिति

अगस्त--2021
राजस्व----788

खाद्य आपूर्ति विभाग----553
ऊर्जा विभाग----441

सुल्तानिया महिला चिकित्सालय----423
पिछड़ वर्ग एवं अल्प संख्यक विभाग--408

पुलिस---339
पेयजल-नगर निगम----309

संस्थागत वित्त---230
लोक स्वास्थ---225

अतिक्रमण--नगर निगम,-----214
लोक शिक्षण----191

लीड बैंक---174
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केस-1,

-अधिक फीस की शिकायत
अन्ना नगर के नजदीक शहर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल के कक्षा 7 में पढऩे वाले छात्र के अभिभावकों ने शिकायत करते हुए बताया कि उनसे ट्यूशन के साथ अतिरिक्त फीस ली जा रही है। इस स्कूल की शिकायत का समाधान न तो कोरोना की पहली लहर में हुआ और न ही दूसरी में। मामला 300 दिन से अधिक लंबित शिकायत सूची में पहुंच गया, समाधान नहीं हुआ।

केस-2,

नामांतरण को लेकर की शिकायत
ग्राम मुगालिया छाप के एक किसान ने अपनी जमीन के नामांतरण के लिए कई बार आवेदन तहसील में प्रस्तुत किया। जब नहीं हुआ तो सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा दी। दिन गुजरने के बाद शिकायत सौ दिन से अधिक लंबित सूची में आ गई। लेकिन समाधान नहीं निकला। ऐसी एक नहीं कई शिकायतें रहती हैं जो सीमांकन, बंटान व अन्य राजस्व प्रकरणों से संबंधित रहती हैं।

लगातार बैठकों में देते हैं निर्देश-कलेक्टर

कलेक्टर अविनाश लवानिया हर सप्ताह होने वाली टीएल बैठक में अफसरों को सीएम हेल्पलाइन की पेंडेंसी निपटाने के निर्देश देते हैं। कुछ समय पूर्व लंबित केसों को लेकर 250 रुपए जुर्माना भी लगाया। शिकायतें काफी कम हुईं, इसके बाद भी सीएम हेल्पलाइन में 8455 शिकायतें बाकी हैं। कलेक्टर ने बताया कि वे लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं ताकि जानता को लाभ मिल सके।