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शिवराज बोले- अब एक ही लक्ष्य, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश

-------------------------ये भी बोले-- चुनाव में मेरा नहीं भाजपा का परफार्मेंस होता है- भाजपा की पहचान गुट नहीं एक परिवार होना है- मुख्यमंत्री रहा या विपक्ष में अपने लोगों के लिए खडा रहा- हर समय मन-मस्तिष्क में एक ही बात कि प्रदेश का विकास हो----------------------------

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Chief Minister Shivraj Singh Chouhan Jandarshan Yatra in Jhirnya

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान


भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोते जागते बस प्रदेश के विकास और आम लोगों का कल्याण ही दिमाग में रहता है। फिर मुख्यमंत्री रहा या फिर विपक्ष में, हमेशा अपने लोगों के लिए खडा रहा। अब एक ही लक्ष्य है और वह है आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाना। इसके लिए हर कदम उठाएंगे। प्रदेश में सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर पत्रिका से विशेष बातचीत में शिवराज ने सियासत को लेकर कहा कि भाजपा की पहचान गुट नहीं पूरे संगठन का एक परिवार होना है। गुट तो कांग्रेस की पहचान है।
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प्रश्न-1. पिछले तीन साल में आप पक्ष में भी रहे और विपक्ष में भी। दोनों भूमिकाओं में प्रदेश के हित के लिए आपने क्या किया। तीन सबसे अहम कदम, पक्ष—विपक्ष दोनों दौर के?
जवाब- मेरा प्रदेश, मेरा परिवार है। इसलिये अपने प्रदेश की जनता को परिवार मानकर उसकी तरक्की व खुशहाली के लिये हमेशा काम करता रहा हूँ। मैं हर सुख-दु:ख में अपने लोगों के साथ खड़ा रहा, फिर चाहे मुख्यमंत्री रहा, चाहे विपक्ष मे रहा। तीन साल में प्रतिपक्षी दल, कांग्रेस की सरकार 15 महीने रही, और मैं विपक्ष में रहा। विपक्ष में रहते हुये मैंने प्रदेश के विकास और आम आदमी के हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आपको याद होगा, कांग्रेस ने प्रदेश के किसानों का कर्र्ज माफ करने का वचन दिया था और बाद में मुकर गई। यह आवाज मैंने प्रमुखता से उठाई। उस 15 माह में पूरे प्रदेश में विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। मंत्रालय, ट्रांसफर और पोस्टिंग कराने के लिए दलालों का अड्डा बन गया था, यह आवाज भी मैंने सदन से लेकर सडक़ तक पुरजोर तरीके से उठाई। सोते-जागते केवल एक ही चीज मन-मस्तिष्क में चलती रहती है, वह है प्रदेश का विकास और आम आदमी का कल्याण। सत्ता में आने के बाद इन 19 महीनों में हमने जो भी किया है, वह आप सभी को पता है। किसानों के लिए फसल बीमा से लेकर उनको अन्य प्रकार से मदद देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 1 लाख 50 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि अंतरित की गई है। कोरोना की दूसरी लहर को पूरी तरह नियंत्रण में किया है। मध्यप्रदेश कोरोना से डरने की बजाय लड़ता रहा और कोरोना को पूरी तरह नियंत्रित करने के साथ-साथ विकास के भी नये कीर्तिमान गढ़ता रहा। वर्ष 2020 में मध्यप्रदेश गेहूं उत्पादन में सभी राज्यों से आगे रहा और 1.29 करोड़ टन गेहूं का उपार्जन किया। किसानों के खातों में 75 हजार करोड़ रुपये भेजे। पिछले 19 माह में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में प्रदेश के 77 लाख किसान परिवारों को लगभग 5 हजार 500 करोड़ रुपये वितरित किये हैं। कोरोना काल में राज्य में 5000 किमी नई सडक़ों का निर्माण हुआ, जबकि 3500 किमी पुरानी सडक़ों का नवीनीकरण हुआ। इसी अवधि में 154 नए पुल भी बनाए गए। हमने आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप भी तैयार किया है। भू-माफियाओं के कब्जे से 3 हजार 559 एकड़ भूमि मुक्त करायी है।
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प्रश्न- 2. ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आने के बाद एक सिंधिया भाजपा अलग हो गई है। इसका दूरगामी प्रभाव क्या होगा, क्या सिंधिया खेमा भाजपा में पूरी तरह घुल-मिल गया है?
जवाब- मैं पहले भी कई बार कह चुका हूँ कि सिंधिया और उनके साथी, दूध और शक्कर की तरह, भाजपा और वे सब घुल-मिल गये हैं। वह सभी मनसा, वाचा, कर्मणा भाजपाई हैं। भाजपा एक परिवार है, यहां सब एक होते हैं। यह उस मोती की माला की तरह हैं, जिसके एक धागे में सारे मनके पिरोये गये होते हैं। भाजपा की पहचान गुट नहीं परिवार की है। यह तो कांग्रेस का कल्चर है, जहां गुट होते हैं। सिंधिया और उनके साथी पूरी जिम्मेदारी के साथ प्रदेश के विकास में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। सिंधिया जी राष्ट्र सेवा और उनके सभी साथी, जो अब भाजपा परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं, वह प्रदेश के विकास में दिन-रात एक किये हुये हैं।
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प्रश्न- 3. पूर्व मुख्यमंत्री हमेशा राशि न होने का रोना रोते थे, कोरोना काल में क्या ऐसा नहीं लगता कि मध्यप्रदेश की विकास, संसाधन और अवसरों की उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं?
जवाब - जहां चाह होती है वहां राह को निकलना ही पड़ता है। मैं कह चुका हूं कि आर्थिक तंगी का रोना यदि कोई मुख्यमंत्री रोता है तो ऐसा मुख्यमंत्री किस काम का? प्रदेश के विकास और आम नागरिकों की सहूलियतों के लिए आर्थिक संसाधनों को बेहतर ढंग से संचालित करना ही उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आवश्यक होने पर कर्ज भी लिया जाना चाहिए, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ नहीं किया। वे मंत्रालय के एसी कमरे में बैठकर इधर-उधर की बैठकों में व्यस्त रहे। यह सच है कि कोरोना बहुत बड़ी चुनौती थी और इसका मुकाबला हमने प्रदेश की जनता को साथ लेकर उसकी भागीदारी से किया। इस दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं को अंचल तक विकसित किया और तीसरी लहर यदि आती है तो उसका भी मुकाबला करने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। हमारा वित्तीय प्रबंधन बहुत ही बेहतरीन है। यही कारण है कि हमारे कुशल वित्तीय प्रबंधन की सराहना स्वयं केन्द्र सरकार ने भी की है। कोरोना काल में 2019 के मुकाबले 2021 में हमने 40 प्रतिशत ज्यादा राशि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की, जिसके कारण हमारी केन्द्र से 0.5 प्रतिशत यानी 5200 करोड़ रुपये कर्ज की पात्रता बढ़ी। मध्यप्रदेश को चिकित्सा उपकरण पार्क की सौगात मिली है। 193 करोड़ रुपये लागत और 358 एकड़ क्षेत्रफल वाले इस पार्क में केन्द्र सरकार 100 करोड़ रुपये की सहायता दे रही है। इस पार्क में 5 हजार से 6 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। इसमें लगभग 12 हजार लोगों को रोजग़ार मिलेगा। तय समय-सीमा में लक्ष्य को पाने का तरीका और आपदा को अवसर में बदलने की सीख उन्होंने ही दी है। कोरोना महामारी के चलते विश्व के अनेक देशों की आर्थिक स्थितियां जब पूरी तरह चरमरा गईं, इसके बावजूद भी मध्यप्रदेश विकास की राह पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल में ही प्रदेश में 550 से अधिक औद्योगिक इकाईयों को 1 हजार 445 एकड से अधिक भूमि आवंटित की गई, जिसमें 14 हजार करोड रुपये से अधिक का पूंजी निवेश और लगभग 37 हजार व्यक्तियों को रोजग़ार मिला। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के तहत किए गए प्रक्रियात्मक सुधारों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश को देश में चौथी रैंकिंग प्राप्त हुई है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढावा देते हुए एक साथ 1 हजार 891 उद्योगों का शुभारंभ हुआ है। इनमें से 776 इकाईयां स्थापित हो गई हैं, इनके माध्यम से लगभग 1 हजार 161 करोड रुपये का पूंजी निवेश और 14 हजार से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर सृजित हुए हैं। कई क्लस्टर बन रहे हैं, जिससे लगभग 25 हजार लोगों के लिए रोजग़ार के अवसर पैदा होंगे। प्रदेश के अन्नदाताओं ने खेतों में पसीना बहाकर उत्पादन में रिकार्ड वृद्धि की। वर्ष 2020 में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन 1 करोड़ 29 लाख मीट्रिक टन हुआ। 19 माह में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों के खातों में 1 लाख 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की।
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प्रश्न-4. कोरोना काल आपके कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती रहा। क्या वर्तमान में आप संतुष्ट हैं? प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर? तीसरी लहर से मुकाबले की आपकी तैयारी क्या है?
जवाब- कोरोना से निपटने में हमने जन भागीदारी का मॉडल बनाया तथा गांवों से लेकर प्रदेश स्तर तक क्राइसिस मैनेजमेंट गु्रप बनाकर निर्णय लिये और काम किया। क्राइसिस मैनेजमेंट समितियों ने ही कोरोना कर्फ्यू के संबंध में स्थानीय स्तर पर निर्णय लिये और इन समितियों ने ही अधिक से अधिक वैक्सीनेशन के लिए जनजागरूकता लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैं स्वयं रात-रात भर जागकर सारी व्यवस्था की मॉनिटरिंग करता रहा। यह सही है कि कोरोना काल एक बड़ी चुनौती लेकर आया था। विपरीत परिस्थितियों में मैंने शपथ लेते ही पहली बैठक कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए मंत्रालय में ली थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना की विकट परिस्थितियों में वसुधैव कुटुंबकम के विचारों को चरितार्थ करते हुए प्रदेश को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति करवाई। जहां तक तीसरी लहर की तैयारी की बात है तो मैं बताना चाहूँगा कि कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्?य सेवाओं में वैक्सीनेशन का काम शत-प्रतिशत कराने की ओर हम तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। वैक्सीनेशन करने में हम देश में नम्बर वन हैं। दिसम्बर की आखिरी तारीख तक प्रदेश के नागरिकों का 100 फीसदी वैक्सीनेशन कराये जाने का लक्ष्य तय है। प्रदेश में जहां एक भी ऑक्सीजन प्लांट नहीं था वहां 201 नये प्लांट स्थापित किये जा रहे हैं, जिनमें से 178 प्लांट स्थापित हो चुके हैं। प्रदेश में 6 नये मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किये गये हैं। हम जनभागीदारी के माध्यम से एक बार फिर कोरोना की तीसरी लहर को पूरी तरह रोकने में सफल होगें।
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प्रश्न-5. हर विधानसभा चुनाव में आपका परफार्मेंस बेजोड रहता है, पार्टी चुनाव हारी तो भी आपका परफार्मेंस अच्छा रहा, लेकिन हर चुनाव में आपके कुछ मंत्री हार जाते हैं, इसका क्या कारण-राज है?
जवाब- विधानसभा चुनाव में मेरा नहीं, भारतीय जनता पार्टी का परफार्मेंस होता है। क्योंकि चुनाव पार्टी लड़ती है। मुझे संतोष है कि प्रदेश की जनता ने हमें हर चुनाव में भरपूर समर्थन और विश्वास दिया है। हार और जीत स्थानीय मुद्दों के कारण भी हो जाती है। भाजपा बेहतर कार्य और विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ती है। जनता के सुख-दु:ख में हमेशा उसके साथ खड़ा रहना भाजपा कार्यकर्ता का एकमात्र धर्म होता है।
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प्रश्न-6. अब मध्यप्रदेश के विकास के लिए आपका क्या लक्ष्य हैं, कोई तीन लक्ष्य बताएं जो प्रदेश को लेकर भविष्य में पूरे करना चाहेंगे?
जवाब- तीन नहीं सिर्फ एक ही लक्ष्य है आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य में शिक्षा, रोगार, स्वास्थ्य, भोजन, कपड़ा, मकान हर स्तर पर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना शामिल है। हम पूरी ताकत से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में लगे हुये हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम उनके एक भारत-श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर ले जा रहे हैं। मध्यप्रदेश उनके इस सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
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