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भोपाल। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ आरके मिश्रा के पिता कुलामणि मिश्रा के मामले में सोमवार को शशिमणि मिश्रा द्वारा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन के खिलाफ की गई शिकायत को आयोग ने नस्तीबद्ध कर दिया। आयोग व आयोग अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह की शिकायतों को सुनने और निर्णय लेने का अधिकार आयोग को नहीं है।
चूंकि शिकायत, आयोग के अध्यक्ष से संबंधित थी, इसलिए आयोग किसी भी धारा में सुनवाई नहीं कर सकता है। इसके चलते दूसरे ही दिन यह शिकायत नस्तीबद्ध कर दी गई। आयोग ने कहा है कि आरके मिश्रा की मां द्वारा की गई शिकायत में कोर्ट की अवमानना योग्य भाषा इस्तेमाल की गई है। साथ ही मिश्रा की मां ने आयोग व कोर्ट की अवहेलना करते हुए पत्राचार किया है।
जबकि मिश्रा की मां शशिमणि ने २१ फरवरी को आयोग में एक आवेदन देकर आयोग की कार्रवाई पर भरोसा जताया था। जिसमें आग्रह किया था कि आयोग की कार्रवाई पर विश्वास है और वह आयोग को कोई चुनौती नहीं देंगे। लेकिन उन्होंने २५ फरवरी को आयोग अध्यक्ष की ही शिकायत कर दी। इसे भी मानव अधिकार आयोग ने आयोग व कोर्ट की अवहेलना बताया है।
पुलिस ने रिपोर्ट के बजाय भेजा याचिका संबंधी पत्र
मंगलवार को भी पीएचक्यू प्रबंधन ने इस मामले की जांच रिपोर्ट पेश नहीं की। जांच रिपोर्ट की जगह एक प्रतिवेदन भेजकर बताया कि आरके मिश्रा व उनकी मां शशिमणि मिश्रा ने मप्र हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।
पीएचक्यू के इस प्रतिवेदन के आधार पर आयोग ने पीएचक्यू को १० दिन का समय देकर कहा कि इस अवधि में कोर्ट का स्टे आयोग या उचित निर्देश पेश करें। ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। ज्ञात हो कि पीएचक्यू ने ७ दिन का समय मांगा था वहीं, आयोग ने तीन दिन का अतिरिक्त समय दे दिया, ताकि तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट सामने आ सके।
मेरी शिकायत मैं ही कैसे सुन सकता हूं। आयोग को इस तरह की शिकायत सुनने का अधिकार नहीं है, इसलिए शशिमणि मिश्रा की शिकायत नस्तीबद्ध कर दी। शशिमणि के पत्र की भाषा अवमानना योग्य है और २१ फरवरी के पत्र के अनुसार उन्होंने कोर्ट की भी अवहेलना की है। हमने पीएचक्यू को १० दिन का समय दिया है, ताकि वे पूर्ण रुप से चाही गई जानकारी पेश कर सकें।
जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन, अध्यक्ष, मानव अधिकार आयोग
Published on:
27 Feb 2019 09:24 am

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