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फेसवॉश में अखरोट-अंजीर नहीं, आपके टूथपेस्ट में प्लास्टिक है!

माइक्रोप्लास्टिक या माइक्रोबीड्स, प्लास्टिक या फाइबर के वो टुकड़े होते हैं, जो पांच मिलीमीटर से भी छोटे आकार के होते हैं। यूएनओ की रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोबीड़्स मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं।

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rishi upadhyay

Dec 12, 2016

microbeads

microbeads

भोपाल। क्या आपके टूथपेस्ट में प्लास्टिक है? ये सवाल हम आपसे इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि टूथपेस्ट औऱ ब्यूटी प्रोडक्टस बनाने वाली तमाम कम्पनियां अपने प्रोडक्ट्स में अंजीर, अखरोट या ऐसे ही खाद्य पदार्थों की मौजूदगी का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत उनके दावों से कोसों दूर है।

खबर है कि ऐसी तमाम कम्पनियां अपने प्रोडक्ट्स में सिर्फ खुश्बू का इस्तेमाल करते हैं। दावों को हकीकत बनाने के लिए ये माइक्रोबीड्स(प्लास्टिक के छोटे कण) को मिलावट के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं।


microbeads


माइक्रोप्लास्टिक या माइक्रोबीड्स, प्लास्टिक या फाइबर के वो टुकड़े होते हैं, जो पांच मिलीमीटर से भी छोटे आकार के होते हैं। यूएनओ की रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोबीड़्स मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं। इतना ही नहीं पर्यावरण में इनकी मौजूदगी जल और भूमि दोनों को ही प्रभावित करती है। पर्यावरण के प्रति इनके गंभीर खतरों को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की कोशिश की जा रही है।


दांत और स्किन चमकाते हैं माइक्रोबीडस, नुकसान कहीं ज्यादा
साबुन, टूथपेस्ट, फेसवॉश, हैंडवॉश जैसी चीजों में माइक्रोबीड्स की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिस साबुन, टूथपेस्ट, फेसवॉश का इस्तेमाल कर आप अपनी त्वचा और दांतों को दुरस्त रखने का सोच रहे हैं, वही आपके शरीर और पर्यावरण के लिए भारी नुकसानदायक साबित हो रहा है। इस समय मार्केट में कुछ कम्पनियों के ऐसे तमाम ब्यूटी प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, जो अखरोट, अंजीर, बादाम, छुहारे जैसी चीजों से बने होने का दावा करती हैं।

जबकि हकीकत में ऐसे प्रोडक्ट्स सिर्फ इनकी खुश्बू लिए हुए होते हैं, जिस दानेदार एक्सट्रैक्ट को आप अखरोट, अंजीर या बादाम समझ रहे हैं दरअसल वो प्लास्टिक है। वो प्लास्टिक जो आपके शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। दांत या त्वचा चमकाने के लिए आप ऐसे दानेदार प्रोडक्ट्स को जमकर रगड़ते हैं, लेकिन जो चीज आपके दांतों औऱ त्वचा पर घिसी जा रही है वो प्लास्टिक ही है।


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5 मिलीमीटर से भी छोटे ये माइक्रोबीड़्स पहले तो आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, इसके बाद ये आपके घर से निकले पानी के रास्ते बड़े जलस्रोतों तक पहुंच जाते हैं। ये छोटी छोटी माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। एनजीटी में अर्जी के बाद अब सरकार भी इसे रोकने के लिए कमर कस चुकी है।


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लगी है अर्जी
माइक्रोबीड्स पर रोक लगाने के लिए एनजीटी में पहली ही अर्जी लगाई जा चुकी है। वहीं केन्द्र सरकार भी एनजीटी की रोक के बाद माइक्रोबीड्स पर रोक लगाने की कोशिश में जुट गई है। इससे पहले भारत के डीसीजीआई यानी औषधि महानियत्रंक ने भी इस बारे में संबंधित पक्षों की राय मांगी थी।

डीसीजीआई के अधिकारियों का कहना है कि ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस तरह के माइक्रोबीड़्स का इस्तेमाल हो रहा है, जिसके बारे में हम जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेंगे। इससे पहले ब्यूटी प्रोडक्ट्स और टूथपेस्ट जैसी चीजों में प्लास्टिक का जमकर इस्तेमाल होने के बाद भी इस मुद्दे को ज्यादा अहमियत नहीं दी गई थी।

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