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आपके घर में ‘बिजली लोड’ की जांच करेगी कंपनी, भोपाल में लगेगी तगड़ी पेनल्टी

Smart Meter: उपभोक्ताओं के मंजूर भार के अनुसार ही संबंधित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था तय होती है। अब इसकी जांच शुरु होगी।

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Electrical loads:बिजली लोड की होगी जांच (Photo Source - Patrika)

Electrical loads:बिजली लोड की होगी जांच (Photo Source - Patrika)

Electrical loads: एमपी के भोपाल जिले में बिजली का बढ़ता भार उपभोक्ताओं की जेब हल्की करेगा। कंपनी अब अपने चार लाख स्मार्ट मीटर से मिले डाटा के आधार पर उपभोक्ताओं के घर में बिजली के लोड की जांच शुरू करेगा। दरअसल हर उपभोक्ताओं को कनेक्शन के समय स्वीकृत लोड होता है। उपभोक्ताओं के मंजूर भार के अनुसार ही संबंधित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था तय होती है।

यदि ऐसे में कोई उपभोक्तता इस भार से अधिक का उपयोग करता है तो उसके लिए अनुमति व तय शुल्क देना होता है। अधिकांश उपभोक्ता ऐसा नहीं करते। स्मार्ट मीटर से कंपनी के पास उपभोक्ताओं के स्वीकृत लोड व उपयोग किए जा रहे लोड की पूरी डिटेल आ गई है। कंपनी अब अतिरिक्त भार के लिए पेनाल्टी लगाने के साथ ही भार बढ़वाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

ऐसे समझें स्थिति

यदि आपका स्वीकृत लोड एक किलोवॉट है और आप अपने यहां डेढ़ एचपी से दो एचपी की कोई भी नई मोटर लगाते है तो आपको कनेक्टेड भार स्वीकृत से अधिक हो जाएगा। जांच में ये स्थिति सामने आती है तो फिर पेनाल्टी देनी पड़ सकती है।

ऑनलाइन ही बढ़वा सकते हैं भार

भोपाल सिटी सर्कल महाप्रबंधक प्रदीप सिंह चौहान के अनुसार, कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर लोड बढ़ाने को लेकर प्रक्रिया दी हुई है। इसका शुल्क भी दिया है। इसे जमा कर आवेदन कर सकते हैं, लोड बढ़ जाएगा। लोड बढऩे का असर बिजली के बिल के फिŸस चार्ज पर पड़ता है। ये लोड के आधार पर ही तय होता है। यानी बिल बढ़ेगा।

सोलर पैनल लगवाने वालों को राहत

मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर से आयोजित जनसुनवाई में ग्रिड इंटरैक्टिव रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन अधिनियम-2024 में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की गई। सुनवाई के दौरान सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को राहत देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिन पर विभिन्न पक्षों ने अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं। आयोग के प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर संयंत्र स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं से ली जाने वाली एक हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस समाप्त की जाएगी।

जनसुनवाई के दौरान राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सोलर उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट दो रुपए का फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है, जो नियमों के विपरीत और अवैध है। उन्होंने दावा किया कि देश में केवल मध्यप्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां ही यह शुल्क ले रही हैं। उन्होंने आयोग से इस शुल्क को तत्काल समाप्त करने की मांग की।