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सदन की कम बैठकों पर चिंता, साल में कम से कम 60 दिन हों बैठकें

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए स्पीकर गौतम

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सदन की कम बैठकों पर चिंता, साल में कम से कम 60 दिन हों बैठकें

सदन की कम बैठकों पर चिंता, साल में कम से कम 60 दिन हों बैठकें

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा (Vidhansabha) के अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि सदन की वर्ष में निर्धारित बैठकें अवश्य होना चाहिए, कम से कम 60 दिन साल में सदन अवश्य चलना चाहिए। लगातार कम होती बैठकें चिंता का विषय है। विधानसभा को वित्तीय स्वतंत्रता भी मिलना चाहिए। इस संबंध में कई कमेटियों की रिपोर्ट भी आ चुकी हैं किंतु अभी तक राज्य सरकारों ने इस पर पालन नहीं किया है। जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के मौके पर गौतम ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कई संकल्प और प्रस्ताव होते हैं, लेकिन उन पर अनुपालन सरकारों के माध्यम से ही संभव है, इसलिए यह भी जरूरी है कि लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में उनका भी सम्मेलन बुलाया जाना चाहिए। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के अनुरूप ई-विधान से सभी राज्यों की विधानसभाएं जल्द से जल्द जुड़ जाएं।

बैठक में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी, मेघालय विधानसभा अध्यक्ष मेताभ लेंगदोह, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र नाथ मेहतो, तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावू, असम विधानसभा अध्यक्ष विस्वजीत दाइम्रे, गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी एवं लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह शामिल हुए।

एमपी के नवाचार बताए पीएस एपी सिंह ने
अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी एवं विधाई निकायों के प्रमुख सचिवों के सम्मेलन में भाग लेते हुए विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने मध्यप्रदेश विधानसभा के नवाचारों को बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने समिति प्रणाली के नवाचार को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि विधायिका के प्रति कार्यपालिका का उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने हेतु कुछ समितियों के कार्यों को विस्तार देकर सदस्यों के शिष्टाचार व सम्मान अनुरक्षण हेतु, कृषि विकास एवं पंचायती राज लेखा परीक्षण जैसी नई समितियां गठित की गईं। इसी तरह समितियों को विभागों से तत्परता से जानकारी प्राप्त करने एवं प्रतिवेदनों के कार्यान्वयन के लिए उठाए गए प्रभावी कदमों को सराहा गया है। उन्होंने विधान मंडलों में डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग के संबंध में भी विचार व्यक्त किए गए।