
भोपाल। मध्यप्रदेश में कमजोर पड़ चुकी कांग्रेस में राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनते ही फिर से उठ खड़े होने को तैयार होती दिख रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन विस्तार जल्द ही होगा। संभव है कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी नए चेहरे ही ताजपोशी की जाए। ऐसे में वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से कुर्सी छिन सकती है।
दरअसल मप्र प्रभारी दीपक बाबरिया को राहुल गांधी का काफी नजदीकी माना जाता है और भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी की ताजपोशी के बाद बाबरिया का फॉर्मूला लागू होने की अधिक संभावनाएं दिख रहीं हैं। बाबरिया द्वारा ये फॉर्मूला कुछ समय पहले ही मध्यप्रदेश के लिए दिया गया था। एक बात और है कि बावरिया अपने पिछले दौरों में प्रदेश कांग्रेस की व्यवस्थाओं और संगठन प्रक्रिया को लेकर संतुष्ट भी नजर नहीं आए थे।
जानकारी के अनुसार करीब दो महीने पहले दीपक बाबरिया को कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी महासचिव के रूप में प्रमोट कर मध्यप्रदेश भेजा गया था। बाबरिया को चुंकि राहुल गांधी की पसंद माना जाता हैं। ऐसे में साफ है कि राहुल की ताजपोशी के साथ ही उनकी ताकत बढ़ेगी और मध्यप्रदेश में बाबरिया के फैसलों में जल्द तेजी आएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाबरिया के इन फैसलों के लागू होते ही कांग्रेस में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। इसके साथ ही कुछ बड़े नेता जो बहुत कम क्षेत्रों में नजर आते हैं, उनकी कुर्सियां जा सकती हैं।
क्या चेहरा होंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया
राहुल गांधी के अध्यक्ष बन जाने के बाद अब बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि विधानसभा चुनाव 2018 के लिए कांग्रेस अपने चेहरे का खुलासा करेगी या फिर बिना चेहरे के ही चुनाव लड़ेगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को बतौर चेहरा प्रोजेक्ट कर सकती है।
हालांकि दूसरे विकल्प के तौर पर यह भी संभव है कि मध्यप्रदेश में बिना किसी अध्यक्ष के भी पार्टी मैदान में जा सकती है। इसकी जगह पर तीन से चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो भी ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बड़े चेहरे के तौर पर सामने आ सकते हैं।
ये फैसले भी होंगे लागू!
मप्र कांग्रेस कमेटी की जिला कमेटियों में केरल पैटर्न पर मंडलम् और सेक्टर व्यवस्था को लागू करने का बाबरिया का फैसला लागू हो चुका है, जिसमें अब जल्द ही नियुक्तियां होंगी।
इतना ही नहीं कांग्रेस की सबसे नीचे की इकाई सेक्टर व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बीच समन्वय के लिए संभागीय समन्वयक की नई कड़ी भी बाबरिया ने तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक स्थानीय निकाय से विधानसभा चुनाव तक प्रत्याशी चयन से लेकर कांग्रेस के कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभागीय समन्वयकों की रहेगी। यहां वे अपने कार्यक्षेत्र में सफल व असफल आयोजनों की रिपोर्ट भी देंगे।
ऐसे नेताओं पर गिर सकती है गाज:
इसके साथ ही संभागीय समन्वयक की रिपोर्ट के अनुसार ही क्षेत्र में नेताओं की सक्रियता व निष्क्रियता का आंकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश प्रभारी बाबरिया ही संभागीय समन्वयकों की नियुक्ति भी करेंगे, लेकिन इसमें कोई भी नाम संबंधित क्षेत्र में प्रदेश के दिग्गज नेताओं से चर्चा के बाद ही फाइनल किया जाएगा।
जानकारों का मानना है कि बाबरिया के इन फैसलों के लागू होते ही कांग्रेस में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। इसके साथ ही कुछ बड़े नेता जो बहुत कम क्षेत्रों में नजर आते हैं, उनकी कुर्सियां जा सकती हैं। जनता से दूरी बना चुके नेताओं पर गाज गिरने से वे लोग कांग्रेस के टिकट पाएंगे जो जनता से जुड़े हुए हैं। इसके चलते कांग्रेस फिर से मध्यप्रदेश में मजबूत स्थिति में आ सकती है। कई उन नेताओं पर गाज गिर सकती है जो पार्टी संगठन में पदाधिकारी हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई जनाधार नहीं है।
Published on:
17 Dec 2017 02:33 pm
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