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कांग्रेस ने बुंदेलखंड में लगाई जीत की बाजी, मोदी लहर के सहारे बघेलखंड को साध रही भाजपा

कांग्रेस ने बुंदेलखंड में लगाई जीत की बाजी, मोदी लहर के सहारे बघेलखंड को साध रही भाजपा - छह मई को सात सीटों पर वोटिंग- बुंदेलखंड और विंध्य की सीटें अहम  

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भोपाल

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Arun Tiwari

May 01, 2019

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भोपाल : प्रदेश में छह सीटों पर वोटिंग के बाद अब कांग्रेस-भाजपा ने अगली सात सीटों पर जमावट कर ली है। इन सीटों पर छह मई को वोट डाले जाएंगे। इन सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस को बुंदेलखंड से बहुत उम्मीदें हैं।

कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के सहारे यहां पर जीत की बाजी लगा दी है। विधानसभा चुनाव में बदले वोटिंग समीकरण से कांग्रेस को उम्मीद की किरण नजर आ रही है। इन सात सीटों में से पांच पर खुद राहुल गांधी ने वक्त दिया है। भाजपा ने विंध्य में अपनी रणनीति के तहत गोटियां फिट की हैं। भाजपा मोदी लहर के सहारे ही विंध्य को साध रही है। भाजपा को लगता है कि जातिगत समीकरणों पर मेादी लहर भारी पड़ेगी।

६ मई को इन ७ सीटों पर वोटिंग :
बुंदेलखंड - टीकमगढ़,खजुराहो,दमोह
बघेलखंड - सतना,रीवा
मध्य क्षेत्र - होशंगाबाद,बैतूल

कांग्रेस को बुंदेलखंड पर भरोसा :
कांग्रेस को इस बार सबसे ज्यादा भरोसा बुंदेलखंड पर है। बुंदेलखंड की तीन सीटों पर सात मई को वोट डाले जाएंगे। जीत की उम्मीद देखकर राहुल गांधी ने इन तीनों सीटों पर चुनाव प्रचार किया है। कांग्रेस को लगता है कि बुंदेलखंड हाथ के साथ है बस आखिरी दम की जरुरत थी जो राहुल की सभा से पूरी हो गई। टीकमगढ़ में भाजपा के उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक हैं जिनसे कांग्रेस की किरण अहिरवार का मुकाबला है।

खजुराहो से कांग्रेस ने विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को उम्मीदवार बनाया है, उनके सामने भाजपा के प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा हैं। दमोह में भाजपा के दिग्गज नेता प्रहलाद पटेल के सामने कांग्रेस ने प्रताप सिंह लोधी को उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर कांग्रेस ने यहां से बढ़त हासिल की है।

टीकमगढ़ में वीरेंद्र कुमार खटीक कांग्रेस उम्मीदवार से २.०८ लाख वोटों से जीते थे लेकिन अब वो बढ़त घटकर सिर्फ ६४ हजार ही बची है। दमोह में प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस को २.१३ लाख वोटों के अंतर से हराया था, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद जीत का अंतर घटकर महज १६ हजार रह गया है। भाजपा की परंपरागत सीट खजुराहो में नागेंद्र सिंह २.४६ लाख से जीते थे, अब जीत का अंतर एक लाख से कम हो गया है।

भाजपा यहां पर ८९ हजार की बढ़त पर आ गई है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजीव सिंह कहते हैं कि इस बार भाजपा के ये गढ़ ढहने वाले हैं। कांग्रेस ने यहां पूरी रणनीति के साथ काम किया है। भाजपा के दिग्गज कांग्रेस के नए चेहरों से हारने वाले हैं। राहुल गांधी ने बुंदेलखंड के अलावा सतना और होशंगाबाद को भी फोकस किया है।

भाजपा ने चला विंध्य जीत का पांसा :

भाजपा विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की योजना पर काम कर रही है। पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला को रीवा और सतना की खास जिम्मेदारी सौंपी है। इन दोनों सीटों पर भाजपा के मौजूदा सांसद उम्मीदवार हैं।

भाजपा एंटी इन्कमबेंसी के असर को भी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा को विंध्य में सबसे ज्यादा भरोसा मोदी लहर का है। रीवा में भाजपा के जनार्दन मिश्रा के सामने कांग्रेस के कांग्रेस के सिद्धार्थ तिवारी हैं, दोनों ब्राह्मण वर्ग से हैं इसलिए यहां जातिगत समीकरण का फॉर्मूला असरदार नहीं रहा।

सतना में गणेश सिंह के सामने कांग्रेस के राजाराम त्रिपाठी हैं। भाजपा को एंटीइन्कमबेसी के कारण जातिगत समीकरण यहां भी बहुत काम का नजर नहीं आ रहा। राजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि विंध्य में मोदी लहर साफ तौर पर महसूस की जा सकती है। युवाओं में मोदी को लेकर क्रेज है इसलिए इन सीटों पर भाजपा की जीत में कोई संदेह नहीं है।