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कांग्रेस में अन्य दलों की तरह थोपा हुआ अध्यक्ष नहीं होगा

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष (congress president) के चुनाव के चलते मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष विभा पटेल (Vibha Patel) ने बेवाकी से कहा कि कांग्रेस में सच्चा लोकतंत्र है। हमारे यहां अन्य दलों की तरह थोपा हुआ अध्यक्ष नहीं होगा।

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कांग्रेस में अन्य दलों की तरह थोपा हुआ अध्यक्ष नहीं होगा

कांग्रेस में अन्य दलों की तरह थोपा हुआ अध्यक्ष नहीं होगा

डॉ. दीपेश अवस्थी

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कशमशपूर्ण चुनाव के मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे यह मुकाबला भी रोचक होता जा रहा है। अध्यक्ष पद के दोनों उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और शशि थरूर (Shashi Tharoor) चुनाव जीतने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। प्रयास है कि समय रहते सभी राज्यों में जाकर वोट मांग लिए जाएं। वोट मांगने के लिए ये मध्यप्रदेश भी आ रहे हैं। मध्यप्रदेश के कांग्रेसी भी उत्साहित हैं। इन्हीं चुनावों को लेकर मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष विभा पटेल से पत्रिका ने चर्चा की। विभा का कहना है कि कांग्रेस में सच्चा लोकतंत्र है, इसलिए अध्यक्ष चुनाव में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई। इससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा, पार्टी भी बुलंदी पर पहुंचेगी। पेश है चर्चा के मुख्य अंश -

सवाल - चुनाव में दोनों उम्मीदवार एक दूसरे के मुकाबले हैं। क्या ऐसा नहीं हो सकता था कि सर्वसम्मति से अध्यक्ष का चुनाव हो जाता।

- कांग्रेस में सच्चा लोकतंत्र है। पार्टी अध्यक्ष चुनाव भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो रहा है। किसी अन्य दल की तरह थोपा हुआ अध्यक्ष हमारे यहां नहीं होगा। इसलिए निर्वाचन की प्रक्रिया अपनाई गई। जो जीतेगा वही हमारा अध्यक्ष होगा।

सवाल - चुनाव हारने और जीतने से उनमें और उनके समर्थकों में मनमुटाव हो सकता है, पार्टी को नुकसान होने की संभावना भी हो सकती है।

- इसमें प्रतिस्पर्धा की क्या बात है। पहले हमारे यहां एनएसयूआई, युवक कांग्रेस में भी चुनाव हुए हैं। चुनाव के बाद सभी एक हो जाते हैं। हां, यह जरूर कहा जा सकता है कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन इससे पार्टी को नुकसान नहीं होता। इस चुनाव में भी पार्टी और मजबूत होगी। कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा।

सवाल - आप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बात कर रहीं हैं, आपकी ही पार्टी के कुछ सांसदों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सोनिया गांधी को पत्र भी लिखा था।

- इस चुनाव में सभी जगह पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है। सभी को मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है। पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता को चुनाव में खड़े होने का अधिकार है। इसलिए पारदर्शिता न होने जैसी कोई बात नहीं कही जा सकती। उन सांसदों ने पत्र क्यों लिखा, मैं इस विषय कुछ नहीं कह सकती।

सवाल - क्या आप मानती हैं कि शशि थरूर धुंआधार प्रचार करने से मल्लिकाजुन खडगे को भी वोट मांगने के लिए निकलना पड़ा है।

- चुनाव मैदान में हैं, तो ऐसे में वोट मांगना भी चाहिए। दोनो ही नेता हमारी पार्टी के हैं, वरिष्ठ हैं। मध्यप्रदेश में दोनों आ रहे हैं, दोनों के लिए पार्टी संगठन की ओर से समान सुविधाएं रहेंगीं। इसलिए हमारे लिए तो दोनों ही समान हैं।

सवाल - आपकी नजर में पार्टी का अध्यक्ष कैसा होना चाहिए, उसमें क्या खूबी हों।

- संगठन चलाने के लिए अनुभव का अपना महत्व होता है, सभी को साथ लेकर काम करने क्षमता होना चाहिए। दोनों नेता अनुभवी है, संगठन को और मजबूती मिलेगी।

सवाल - क्या आपको लगता है कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन में कोई कमी है, शायद इसलिए लोग पार्टी छोड़कर भी जा रहे हैं।

- संगठन मजबूत है। जो लोग पार्टी छोड़कर जा रहे थे, उनकी अपनी महत्वाकांक्षाएं थी। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए वे आज जिस मुकाम पर हैं, इसी पार्टी के कारण ही हैं। इसलिए कुछ लोगों के पार्टी छोडऩे से यह नहीं कहा जा सकता कि संगठन कमजोर हुआ है, या फिर पार्टी में कोई दिक्कत आ गई थी।

सवाल - क्या पार्टी के सामने अभी भी कई चुनौतियां है, नए अध्यक्ष के सामने भी चुनौतियां होंगीं।

- चुनौतियां तो हमेशा होती है। हमारे नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी बेहतर काम कर रही है। नई ऊंचाईयों को पार्टी ने छुआ। अब जो भी अध्यक्ष होगा उसके नेतृत्व में पार्टी और बेहतर काम करेगी।

सवाल - मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बैठकों में लगातार कहते हैं कि हमारा मुकाबला भाजपा संगठन से है, तो क्या कांग्रेस संगठन कमजोर है।

- कांग्रेस संगठन मजबूत है, कमलनाथ जी संगठन में और मजबूती चाहते हैं। प्रयास यही है कि कांग्रेस की विचारधारा से अधिक से अधिक जुड़े। यह भी सही है कि कांग्रेस की विचारधारा गांव-गांव तक हैं, आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें पहचानकर कांग्रेस की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।