
civil surgeon suspended
पीपुल्स डेंटल कॉलेज के डॉक्टरों ने इलाज कराने पहुंचे एक नाबालिग का गलत दांत उखाड़ दिया। यह उसका मूल दांत था जो अब कभी नहीं उग सकता। गलत उपचार करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने उपचार करने वाले डॉक्टर सहित अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ फैसला सुनाया है।
फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश आरके भावे और पीठासीन सदस्य सुनील श्रीवास्तव की बेंच ने फरियादी अंकुर चंदेल के आवेदन पर सुनवाई के बाद मैनेजिंग डायरेक्टर पीपुल्स डेंटल अकादमी भानपुर डॉक्टर अमिताभ कुल्हारे और डॉक्टर अजय पिल्लई, सर्जन एचओडी के खिलाफ यह फैसला सुनाया है।
जिसमें इन डॉक्टरों को नाबालिग के उपचार में खर्च की गई राशि 20 हजार 680 रुपए के अलावा 1 लाख रुपए हर्जाना और 5000 रुपए परिवाद व्यय के रूप में दो महीने में अदा करने के आदेश दिए हैं । बैंच ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि डॉक्टर 2 महीने के भीतर इस राशि का भुगतान फरियादी को नहीं करते हैं तो उनको 9 प्रतिशत ब्याज के साथ यह राशि अदा करनी होगी।
यह था मामला
नाबालिग 7 नवंबर 2009 को अपने दांतों की सामान्य जांच एवं सफाई कराने पीपुल्स डेंटल अकेडमी गया। वहां पर उसे बताया गया कि उसके ऊपरी जबड़े में सामने की दाईं ओर अंदर की तरफ क्रोलिंग दांत है, जो सामान्य तौर से बाहर दिखाई नहीं देता है। इस दांत का इलाज शुरू कर दिया। जबकि उसके इलाज का प्रकार उसमें लगने वाला समय इलाज का तरीका और खर्च के बारे में आवेदक को जानकारी नहीं दी गई। फरियादी नाबालिग था लेकिन डॉक्टरों ने उपचार के लिए उसके अभिभावक से भी अनुमति नहीं ली।
30 नवंबर 2009 को फरियादी की सलाह और अनुमति के बिना ही पीपुल्स डेंटल अकादमी के डॉक्टरों ने उसका दांत निकाल दिया और ब्रशेस लगा दिए। 3 सितंबर 2012 को परेशानी होने पर नाबालिग फिर उपचार के लिए आया। उपचार के दौरान फरियादी को पता चला कि डॉक्टरों ने उसका मूल दांत ही निकाल दिया है जो खराब नहीं था और यह अब कभी उगेगा भी नहीं।
पीपुल्स डेंटल अकेडमी की तरफ से सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि फरियादी की सहमति के बाद ही इलाज किया गया। फरियादी द्वारा डॉक्टरों की सलाह के अनुसार खाने पीने में लापरवाही बरतने की वजह से उनकी स्थिति खराब हो गई जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार है।
Published on:
30 Mar 2019 09:15 am
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