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एम्स भोपाल में पहली बार कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू, किडनी ही नहीं मल्टी ऑर्गन फेलियर के मरीजों के लिए भी कारगर

यह सुविधा शुरू करने वाला एम्स प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल, सामान्य डायलिसिस से 10 गुना महंगी, आयुष्मान वालों का इलाज होगा मुफ्त

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भोपाल

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Sunil Mishra

Sep 20, 2023

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एम्स भोपाल में कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी हुई शुरू

भोपाल. एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में पहली बार कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू हो गई है। जिन मरीजों की डायलिसिस संभव नहीं होती। यह उनकी जान बचाने में कारगर है। किडनी ही नहीं बल्कि मल्टी ऑर्गन फेलियर से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों में इसके जरिए मरीजों का इलाज किया जाना संभव हुआ है। इसके शुरू होने से एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट का रास्ता भी साफ हो गया है। अभी भोपाल में सिर्फ निजी अस्पताल और सरकारी में हमीदिया में होता है। लेकिन कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी किसी अस्पताल में नहीं है।

सामान्य डायलिसिस से इस तरह अलग
सीकेआरटी डायलिसिस का एक विशेष रूप है। यह सामान्य डायलिसिस से कई गुना अधिक प्रभावशाली है। इसकी एक मशीन की कीमत 20 लाख से अधिक है। इसके जरिए शरीर में बनने वाले उन लार्ज मॉलीक्यूल को फिल्टर करती है जो सामान्य डायलिसिस से फिल्टर नहीं होते है। इसके लिए इसमें अल्ट्रा प्योर (साफ) वाटर (पानी) का प्रयोग किया जाता है।

खर्चा दस गुना ज्यादा है, सामान्य डायलिसिस दो हजार प्रति विजिट

सामान्य डायलिसिस में जहां दो हजार रुपए प्रति विजिट खर्चा आता है। वहीं कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी में एक विजिट का खर्च 25 हजार है। ये उस स्थिति में कारगर है जब पेशेंट को सामान्य डायलिसिस से राहत नहीं मिलती। उसकी स्थिति किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अनुकूल नहीं होती है। प्रदेश में एम्स में पहली बार ये सुविधा शुरू हो रही है। आयुष्मान के मरीजों के लिए फ्री, अन्य को देने होंगे 25 हजार।

ऐसे मरीजों में कारगर

- यह तकनीक किडनी फेल होने वाले गंभीर रोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, साथ ही जिनका रक्तचाप कम है।
- मस्तिष्क की चोटों और रक्तस्राव की समस्याओं वाले रोगियों में भी ये काफी कारगर है।

एक मरीज को मिला नया जीवन

एम्स के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र अटलानी के अनुसार यह थेरेपी एक ऐसे मरीज में शुरू की गई है, जिसे एक साथ सेप्टिक शॉक, श्वसन विफलता और किडनी फेल थी। मरीज को कंटीनुअस किडनी रिप्लेसमेंट थेरेपी दी गई। जिससे अब मरीज की हालत में सुधार हो रहा है।