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डॉक्टरी 10 से छह बजे का जॉब नहीं है: प्रो. पॉल

एम्स का पहला दीक्षांत समारोह: सबीह कामिल को मिले दस गोल्ड मेडल

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bhopal

भोपाल. आप लोगों ने डिग्री पूरी कर ली है, इसके लिए सब को बहुत सारी बधाई, लेकिन मैं आपको बता दूं कि डॉक्टरी 10 से छ: बजे जैसा काम नहीं है। खासकर एम्स जैसे संस्थान में आपको 24 घंटे तक काम करना होगा। यदि आप गंभीरता से काम नहीं कर सकते तो यहां ना आएं। यह कहना है नीति आयोग के सदस्य और एमसीआई के चैयरमैन प्रो. वीके पॉल का। वे रविवार को एम्स भोपाल पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप मे शिरकत करने राजधानी आए थे। उन्होंने छात्रों से देश में रह कर काम करने की अपील भी की।
उन्होंने कहा कि आज देश में स्पेशलिस्ट निर्सिंग फेसिलिटी नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि डिग्री लेने के बाद छात्र विदेश चले जाते हैं। देश में 65 फीसदी आबादी 25 वर्ष के आसपास है। ऐसे में हम इनमें इन्वेस्ट नहीं करते तो अगली पीढ़ी को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। समारोह में 2012 और 2013 के छात्रों को डिग्रीयां प्रदान की गई। इनमें एमबीबीएस 2012 के 48 व 2013 के 78 छात्रों को डिग्री दी गई। नर्सिंग में 2013 व 2014 के 117 छात्रों को सम्मानित किया गया। डीएचआर के पूर्व सचिव डॉ.़ वीएम कटोच और डीएचार की सचिव प्रीति सुदान, एम्स भोपाल के अध्यक्ष प्रोफसर वायके गुप्ता शामिल हुए।

छ: महीने में पौने नौ लाख मरीजों का इलाज
आयुष्मान योजना के बारे में बताते हुए प्रो. पॉल ने बताया कि आयुष्मान योजना को कई सालों तक याद किया जाएगा। बीते छह माह में ही 884000 मरीज इसका लाभ ले चुके हैं। हर दिन करीब 10 करोड़ रुपए की बिलिंग की जाती है । उन्होंने बताया कि वे इसके तहत देश में 1.5 लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शुरू करेंगे।
कार्यक्रम में नहीं आए सांसद
समारोह के दौरान सांसद की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही। दरअसल सांसद एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी का सदस्य होता है, इसके साथ ही वो हेल्थ मिनिस्टर के रूप में भी एम्स में मौजूद रहते हैं। ऐसे में उनका समारोह में शामिल ना होना आश्चर्यजनक था। इस दौरान एम्स के लोग यह कहते सुने गए इस मामले को संसद में भी उठाएंगे।
10 ओटी और ट्रॉमा सेंटर शुरू
समारोह के बाद मुख्य अतिथियों ने मरीजों के लिए नई सुविधाओं की शुरुआत की। सबसे पहले ओटी कॉम्पलेक्स में 10 ऑपरेशन थिएटर शुरू किए गए। एम्स में ओटी की संख्या बढकऱ अब 17 हो गई है। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर और प्रदेश की सबसे उत्कृष्ट टीबी लैब का शुभारंभ किया गया।
भोपाल एम्स जवान हो गया: डॉ. कटोच
डॉ. वीएम कटोच ने कहा कि भोपाल एम्स में कम समय इतनी ऊंचाई पाली है। यह अपने आप में गौरव करने वाली बात है। एम्स दिल्ली से तुलना ना करें, यह मध्य भारत का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल है। संस्था निदेशक डॉ. सरमन सिंह ने कहा कि साल 2019 के अंत तक सभी लक्ष्य हासिल करेंगे। इसमें 960 बिस्तर का अस्पताल, 24 घंटे इमरजेंसी सेव सहितअन्य सुविधाएं शामिल हैं।

यही रहकर तकनीक पर काम करूंगा
दीक्षांत समारोह में 2013 बैच के सबीह कामिल को एमबीबीएस के सभी 10 गोल्ड मेडल दिए गए। फिलहाल एम्स दिल्ली से एमडी कर रहे कामिल ने बताया कि मैं देश में रहकर ही मेडिसिन में नई तकनीक पर काम करूंगा। कामिल के पिता खेती करते हैं व मां प्रायमरी स्कूल में पढ़ाती हैं।
पैरों में इतनी मिट्टी जम जाती थी...
दीक्षांत का पहला गोल्ड मेडल पाने वाले 2012 बैच के अभिषेक आनंद ने बताया कि उसका दाखिला एम्स रायपुर में भी हो गया था, लेकिन मैं जब यहां टीचर्स से मिला तो यहीं एडमिशन ले लिया। जब वे यहां आए तो कुछ भी नहीं था, पैरों में इतनी मिट्टी जम जाती थी कि लगता था कि दो इंच लंबाई बढ़ गई।
विदेश जाने का
कभी नहीं सोचा
नर्सिंग में तीन गोल्ड मेडल पाने वाली ज्योथिस जॉनी ने बताया कि सफलता के पीछे मेहनत के साथ ही एम्स भोपाल के टीचर्स हैं। यहां की टीचिंग फैसिलिटी एम्स दिल्ली से बेहतर है। उन्होंने बताया कि यह कभी नहीं सोचा कि विदेश जाकर काम करुंगी।