
cooperative societies recognized as startups (फोटो- Patrika.com)
MP News: अब स्टार्टअप केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहेंगे बल्कि गांव-कस्बों में भी शुरू होंगे। क्योंकि सहकारी समितियां (Cooperative Societies) भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकेंगी। इसमें बहुराज्यीय और राज्यों में पंजीकृत समितियां भी शामिल हैं। इससे गांव कस्बों में भी नवाचारों की शुरुआत होगी। ग्रामीण उद्योगों और समुदाय आधारित उद्यमों को भी आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और उसके निर्यात तक में मदद मिल सकेगी।
स्टार्टअप इंडिया के तहत केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले इंसेंटिव मददगार बनेंगे। साथ ही उन्हें तय अवधि तक टैक्स में छूट का भी लाभमिलेगा। केंद्र सरकार ने स्टार्टअप की परिभाषा में बदलाव कर सहकारी समितियों को भी इसमें शामिल किया है। इसके साथ स्टार्टअप के टर्नओवर की सीमा भी 100 से बढ़ाकर 200 करोड़ प्रति वर्ष की है। इससे 200 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनियां और सहकारी समितियों का भी स्टार्टअप के रूप में पंजीयन हो सकेगा।
मप्र में अभी 4536 प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स) पंजीकृत हैं। सहकार से समृद्धि के तहत इन्हें बहुउद्देश्यीय बनाने का काम चल रहा है। इनमें से कई मैक्स अलग-अलग काम पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसी, जन औषधि केन्द्र, जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे काम कर रही हैं। अब अच्छा काम करने वाली पैक्स का स्टार्टअप के रूप में भी पंजीयन हो सकेगा। इससे वे तेजी से आगे बढ़ सकेंगी।
एआइ, रोबोटिक्स, बायोटेक जैसी डीप टेक में स्टार्टअप्स को ज्यादा लाभ देने के प्रावधान हैं, क्योंकि इन्हें विकसित होने एवं रिसर्च एंड डेवलपमेंट में समय और निवेश ज्यादा लगता है। डीप टेक स्टार्टअप की मान्यता की अवधि को बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है। टर्नओवर की सीमा को भी बढ़ाकर 300 करोड़ वार्षिक कर दिया गया है। इससे तकनीकी क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा मिलेगा।स (MP News)
Published on:
26 Feb 2026 01:08 am
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