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कॉर्नर के प्लॉट की कीमत अब 10 फीसदी ज्यादा

विकास प्राधिकरणों के नियम बदलेंगे

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भोपाल. प्रदेश सरकार विकास प्राधिकरणों की प्रॉपर्टी के नियमों में बदलाव करने जा रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश विकास प्राधिकरण प्रबंधन एवं व्ययन नियमों में बदलाव किया जाएगा। इसके तहत किसी भी प्रोजेक्ट में कॉर्नर के प्लॉट की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन से 10 फीसदी ज्यादा होगी। अभी सभी विकास प्राधिकरण अपने हिसाब से कीमत तय करते हैं।
प्रस्तावित नियमों में प्रॉपर्टी का नामांतरण शुल्क बढ़ाना भी शामिल है। अभी तक शुल्क 5000 रुपए फिक्स था, लेकिन अब इसे प्रॉपर्टी की कलेक्टर गाइडलाइन से जोड़कर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यदि यह 5000 रुपए से कम होता है तो 5000 रुपए ही लगेंगे। इससे हितग्राही की जेब पर बोझ आना तय है। इसके अलावा लीज अवधि के बीच में उसकी श्रेणी में बदलाव किया जा सकेगा। अभी आवासीय को व्यावसायिक करने में लीज अवधि पूरी होने का इंतजार करना होता है। सीईओ और संचालक मंडल के अधिकारों में भी फेरबदल करना प्रस्तावित है।

- ये होंगे महत्त्वपूर्ण बदलाव
लॉटरी से चयनित प्रॉपर्टी के पजेशन के पहले उपभोक्ता उपलब्ध प्रॉपर्टी में से दूसरे का चयन कर सकेगा। इसके लिए उसे आवेदन करना होगा। इसके लिए उसे कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से पांच फीसदी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। अभी ऐसा बदलाव नहीं हो सकता है।
पूर्णत: विकसित प्रॉपर्टी-प्लॉट को मुख्यत: एकमुश्त कीमत पर ही बेचा जाएगा। इसमें अधिकतम आठ तिमाही की किस्त की जा सकती है, लेकिन इसके लिए 10 फीसदी ब्याज देना अनिवार्य होगा। अभी हर जिले में रेपो रेट पर अलग-अलग ब्याज लगता है। अब फिक्स दस फीसदी ब्याज रहेगा।
30 साल की लीज के पट्टे को आवासीय श्रेणी में 0.5 फीसदी और व्यावसायिक श्रेणी में एक फीसदी बाजार मूल्य का प्रीमियम अतिरिक्त देकर रिन्यू किए जाने का भी प्रस्ताव है।
प्रस्तावित नियमों में लीज रिन्यूअल के अधिकार विकास प्राधिकरणों के सीईओ को दिए जा रहे हैं। अब तक यह अधिकार संचालक मंडल के पास होते थे।


आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक उपयोग के मामले में समझौते और जुर्माने के अधिकार सीईओ से लेकर संचालक मंडल को देने का प्रस्ताव है।
कोई भी उपभोक्ता अपनी प्रॉपर्टी के पास खाली पड़े प्राधिकरण की जमीन के टुकड़े को कलेक्टर गाइडलाइन पर ही खरीद सकेगा। इसके लिए उसे आवेदन करना होगा।

- इसलिए पड़ी जरूरत
सरकार की कोशिश है कि विकास प्राधिकरणों की प्रॉपर्टी में साठगांठ खत्म हो जाए। कई जगह विवाद वाली प्रॉपर्टी की सीईओ के स्तर पर समझौते करके सस्ते दामों में खरीदी-बिक्री कर ली जाती थी। इसका असर भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों के प्राधिकरणों में काफी होगा। इन दोनों शहरों सहित अन्य शहरों के प्राधिकरणों के प्लॉट, फ्लैट, मकान व दुकान सहित अन्य प्रॉपर्टी इन नियमों के दायरे में आएंगी।