कोरोना की दूसरी लहर में भी सामान्य बेड, ऑक्सीजन बेड से लेकर रेमेडेसिवर इंजेक्शन तक की भारी किल्लत थी
भोपाल. राजधानी में तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है, हर रोज मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, यही नहीं पॉजीटिविटी रेट भी बढकऱ 10 से ज्यादा हो गया. सरकार ने भी तीसरी लहर की आशंका जताई थी और इससे निपटने के लिए दूसरी लहर से ही पुख्ता तैयारियों के दावे किए जा रहे थे पर हकीकत कुछ और ही है. शहर में हॉस्पिटल बेड, आइसीयू और डॉक्टर बढऩे की बजाए कम हो गए हैं. सार्थक पोर्टल पर स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल में मौजूद संसाधनों ने ये पोल खोली है.
कोरोना की दूसरी लहर में सामान्य बेड, ऑक्सीजन बेड से लेकर रेमेडेसिवर इंजेक्शन तक की भारी किल्लत थी. सरकार का दावा था कि दूसरी लहर के मुकाबले राजधानी सहित पूरे प्रदेश में कोरोना से लडऩे के ज्यादातर संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं, लेकिन सरकारी दावों की पोल खुलने लगी है. शहर में दूसरी लहर के मुकाबले हॉस्पिटल बेड और डॉक्टरों की संख्या बढऩे की बजाए कम हो गई हैं. यह खुलासा सरकार के सार्थक पोर्टल की तुलनात्मक रिपोर्ट से हुआ है. पोर्टल पर दूसरी लहर में 24 मई और वर्तमान ससांधनों की जानकारी पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई.
आईसीयू कम हुए तो बढ़ गए ऑक्सीजन बेड: रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी लहर के दौरान शहर में 135 डॉक्टर सेवाएं दे रहे थे लेकिन अब इनकी संख्या 96 ही बची है. आईसोलेशन बेड भी 2976 से घटकर 2357 हो गए. इसी तरह आइसीयू बेड भी 2044 से 1974 हो गए. दूसरी लहर में शहर में 3927 ऑक्सीजन बेड थे इनकी संख्या 24 बढकऱ 3951 हो गई है.
अनुबंध कम होने से अभी फर्क आ रहा है नजर
इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि 24 मई को दूसरी लहर पीक पर थी. इस दौरान शहर में 150 से ज्यादा निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज हो रहा था, वहीं आयुष और अन्य विभागों के चिकित्सकों से अनुबंध था. इस बार कोरोना कमजोर है, कम मरीज भर्ती हो रहे हैं. ऐसे में अभी अनुबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है. यही कारण है कि इस बार संसाधन कम नजर आ रहे हैं.