22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पत्रिका अभियान में उद्योगपतियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कही मन की बात

उद्योगपति बोले - उद्योगों पर आ रहा भार भी शेयर करे सरकार, लॉकडाउन में हो रहे नुकसान के चलते उद्योगों को मिलें राहत...।

3 min read
Google source verification

भोपाल

image

Manish Geete

Apr 11, 2020

bhopal.jpg

(वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उद्योगपतियों ने रखी अपनी बात...।)

भोपाल. लॉकडाउन के चलते तमाम व्यापार-व्यवसाय बंद हैं। उद्योगों में काम लगभग बंद जैसा हो गया है। चूंकि 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन है, ऐसे में उद्योग-व्यापार संचालित करने वालों की मंशा को जानने की कोशिश की गई। उद्योगपतियों की राय है कि उद्योगों पर आ रहे भार को बांटा जा सकता है। बैंक कुछ राहत दें, कुछ बिजली के मामले में राहत मिले और कुछ राहत सरकार से मिल जाए तो उद्योगों को बचाया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग भी की है।

पत्रिका द्वारा उद्योगपतियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की गई। उनका कहना है कि कोरोना के कारण उद्योगों की स्थिति पिछले करीब एक माह से खराब चल रही है। जब से चीन में कोरोना की खबरें आना शुरू हुईं, तब से कच्चा माल और तैयार माल का आना-जाना रुक गया। ऑर्डर रद्द होने लगे। भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन कर दिया गया। लॉकडाउन आगे बढ़ता है तो क्या होगा। इस पर उद्योगपतियों का कहना है कि इस महामारी से देश लड़ रहा है। हम भी लड़ रहे हैं। इकाइयां बंद करके घर बैठे हैं, लेकिन चिंता इस बात की है कि लॉकडाउन के चलते जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई कौन करेगा। बैंकों की तरफ से कोई राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही। जिन किस्तों को तीन माह आगे बढ़ाने की बात कही है, वह तो ठीक है लेकिन ऋण पर जो ब्याज लगेगा, क्या सरकार उसे माफ करेगी। उन्होंने उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए बड़े राहत पैकेज की मांग की है।

नहीं तो बंद हो जाएंगे कई उद्योग
फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि कुछ उद्योग 20-50 साल पुराने भी हैं, तो कुछ 2-5 साल पहले शुरू हुए हैं। कोरोना संकट के चलते पुराने उद्योग एक बार सरवाइव कर जाएंगे लेकिन जो उद्योग कुछ साल पहले शुरू हुए हैं, जिनके ऊपर लाखों का कर्ज है। संकट के इस दौर में यदि राहत नहीं मिलती तो उनका बंद होना निश्चित है। इसलिए सरकार ट्रेडवाइज राहत देने की घोषणा भी कर सकती है। इस समय जो हालात हैं, उससे इकाइयों को संभलने में चार-छह साल लग जाएंगे।

एक नजर
500 फैक्ट्रियां मंडीदीप में
700 छोटी-बड़ी इकाइयां गोविंदपुरा में
5 लाख मजदूर काम करते हैं प्रदेश की फैक्ट्रियों में
250 इकाइयां लॉकडाउन में भी चल रहीं मप्र में
12 से अधिक इकाइयां मंडीदीप में संचालित इस समय

क्या कहते हैं उद्योगपति

यह समय सभी के लिए कोरोना जैसी महामारी से लडऩे और अपने जीवन को बचाने का है। किसी तरह की बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। सभी को एक-दूसरे की परेशानी को समझना चाहिए। इंजन की चिंता किए बिना डिब्बों की चिंता करना व्यर्थ होगा।
डॉ. अजय नारंग, कार्यकारी अध्यक्ष, विश्व संवाद केन्द्र

0-----------------------------------0

कोरोना के चलते मार्केट को उठने में लंबा समय लगेगा। यदि लॉकडाउन का पीरियड लंबा खिंचता है तो कई इकाइयां आर्थिक संकट के चलते बंद हो जाएंगी। इसलिए ईएसआई की तरफ से लेवर को ज्यादा मदद मिलनी चाहिए।
राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष, एसो. ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

0-----------------------------------0

माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्री को लेबर पेमेंट करने में काफी घाटा हो रहा है। इसलिए सरकार से मांग की है कि हम एडवांस लेबर पेमेंट कर दें लेकिन वर्कर उसे अगले छह माह में एडजस्ट कर दें। यदि ऐसा होगा तो माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्री को बहुत राहत मिल जाएगी।
नरेन्द्र कुमार सोनी, उपाध्यक्ष, एसो. ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

0-----------------------------------0

लॉकडाउन का पीरियड अभी फिक्स नहीं है कि यह कब खत्म होगा। ऐसी स्थिति में यदि उद्योग शुरू भी होते हैं तो उन्हें कम से कम अगले तीन माह का प्रोडक्शन का लॉस होगा। इसलिए पीएफ, ईएसआई का कुछ भार सरकार को वहन करना होगा, तभी इकाइयों को कुछ राहत मिल सकती है।
मनोज मोदी, पूर्व अध्यक्ष, एसो. ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

0-----------------------------------0

मिनिमम वैजेस देना होगा
इस समय इकोनॉमी को नहीं देखते हुए मिनिमम वैजेस फिक्स होना चाहिए। हर आदमी को लॉस (नुकसान) को शेयर करना होगा। अभी तक हम प्रॉफिट शेयरिंग की बात कर रहे थे, अब हमें लॉस शेयरिंग के बारे में सोचना होगा। इसी तरह बैंकों को अपने कर्जदारों से ईएमआई रोक देना चाहिए।
केएस नंदा, डायरेक्टर, इंदर इंजीनियरिंग

0-----------------------------------0

कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से किसी भी उद्योग चलाने वाले के ऊपर लेवर पेमेंट का भार ज्यादा आएगा। इसलिए ईएसआई के थ्रू मदद मिलनी चाहिए। वैसे भी लॉकडाउन खुलने के बाद सबसे बड़ी समस्या लेवर की ही आएगी। लेवर शहरों से निकल गई है। खेती का समय है, इसलिए लेबर को लोकल में ही काम मिल गया है।
नीरज जैन, महासचिव, एसो.ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

0-----------------------------------0

इस समय लाभ-हानि की बात नहीं की जा सकती, बल्कि आम आदमी के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ सवाल है। इसलिए हम लोग भी सामाजिक एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी उठाते हुए काम कर रहे हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद उद्योगों को खड़े होने में तीन से चार महीने का समय लगेगा, लेकिन हम सरकार के निर्णय से सहमत हैं।
डॉ. राधाशरण गोस्वामी, चेयरमैन, एमपी फेडरेशन

0-----------------------------------0


कोरोना वायरस से पूरी दुनिया को परेशानी उठानी पड़़ रही है, लेकिन ऐसे समय में भी कई एजेंसियां रेटिंग घटाने का बोल रही हैं। इधर बैंकों ने कोई राहत की घोषणा नहीं की है। ऐसे में उद्योग आगे कैसे काम करेंगे यह समझ से परे है। पेड़ की जड़ को पानी नहीं मिलेगा तो वह कैसे फल देगा।
सीपी शर्मा, उद्योगपति

0-----------------------------------0