
भोपाल. पंचायत विभाग के संविदा कर्मचारी भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज होते ही बर्खास्त कर दिए जाएंगे। कोर्ट से आरोपों से बरी होने के बाद भी सेवा में वापसी नहीं की जाएगी। उनके पास इस तरह के दावे का कोई आधार भी नहीं होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कुछ जिलों से संविदा कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामलों में ढील बरते जाने पर इस आशय का आदेश जारी किया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार वर्तमान में १५ हजार से अधिक संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। बीते एक साल में २० से अधिक संविदाकर्मियों को भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त पाया गया, इनमें परियोजना अधिकारी से लेकर रोजगार सहायक तक शामिल हैं। कुछ जिलों से आरोपी संविदा कर्मियों के मामले में सीधे निर्णय लेने की बजाय मार्गदर्शन मांगकर महीनों का समय जाया किया। कोर्ट से आरोपों से बरी होने के बाद भी सेवा में वापसी नहीं की जाएगी। उनके पास इस तरह के दावे का कोई आधार भी नहीं होगा। इनके सार्वजनिक रूप से काम करते रहने से विभाग की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा। इसे ध्यान में रखते हुए अपर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने आदेश जारी किए हैं।
इसलिए लिया गया निर्णय
नियमित कर्मचारियों की तरह संविदा कर्मियों की सेवा शर्तें नहीं होती हैं। उन्हें न तो स्थानांतरण में भेजा जा सकता है न ही अटैच किया जा सकता है। अधिकारी टे्रप होने या भ्रष्टाचार के मामलों में नियमित कर्मचारियों की तरह चार्जशीट पेश होने का इंतजार करते हुए सेवा बनाए रखते हैं। इस विरोधाभास को खत्म करने कार्रवाई का आदेश दिया गया है।
आदेश में नहीं होगा कारण का उल्लेख
आरोपी संविदा कर्मियों की बर्खास्तगी के आदेश में उन कारणों का उल्लेख नहीं किया जाएगा, जिस वजह से सेवा से हटाए जाएंगे। केवल उन्हें सेवा समाप्त कर बर्खास्त किए जाने का ही आदेश नियोक्ता द्वारा जारी किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि आरोपी संविदाकर्मी बरी होने के बाद फिर से सेवा में वापसी के लिए दावा नहीं कर सके।
Published on:
02 Mar 2018 04:28 pm
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