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कम बारिश से तरसाया, अब सोयाबीन में तना मक्खी कीट का प्रकोप

किसानों के लिए एक और बुरी खबर है। सोयाबीन में तना मक्खी कीट के प्रकोप से फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। यह जानकारी लगते ही किसान बेहद चिंतित हंै, क्योंकि उसने काफी बड़ी रिस्क उठाने के बाद महंगा बीज खरीदकर सोयाबीन की बुवाई की थी।

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कम बारिश से तरसाया, अब सोयाबीन में तना मक्खी कीट का प्रकोप

किसानों के लिए एक और बुरी खबर है। सोयाबीन में तना मक्खी कीट के प्रकोप से फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। यह जानकारी लगते ही किसान बेहद चिंतित हंै

गुना. कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार वर्तमान में सोयाबीन की फसल बेहतर स्थिति में है, लेकिन कहीं-कहीं वर्षा कम होने के कारण फसल मुरझा रही है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार कीट का प्रकोप पूरे जिले में है। सही कीटनाशक का उपयोग सही समय पर किया जाना जरूरी हो गया है। मुख्य रूप से चना की इल्ली, सेमीलूपर तथा तना मक्खी कीट का प्रकोप है। तना मक्खी कीट पुष्पन और फलन पर असर डालेगा। पौधे में पीलापन दिखाई देगा। इससे पौधे सूखने लगते हैं और पीले दिखाई देते हैं।

किसान ऐसे करें कीट की पहचान
कीट की मैगट सफेद रंग की तने के अंदर रहती है। व्यस्क कीट चमकीले काले रंग का दो मिमी आकार का होता है। प्रभावित पौधे के तने को चीरकर देखने पर बहुत छोटी इल्ली दिखाई देती है। यह कीट फसल अवस्था में दो से तीन बार अपने जीवन चक्र को पूर्ण करता है और सोयाबीन को भारी क्षति पहुंचाता है। कीट की मादा पत्तियों पर पीले रंग के अंडे देती है। इनकी मैगट निकलकर पत्तियों की शिराओं में छेद कर सुरंग बनाती हुई तने में प्रवेश करती है और तने को खोखला कर देती हंै।

इस बारे में क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र आरोन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार तना मक्खी कीट से फसल को बचाने के लिए समय रहते पहचान और नियंत्रण जरूरी है। किसान जो कीटनाशक का उपयोग करें, वह कृषि वैज्ञानिक और विभाग के आला अधिकारियों से सलाह के पश्चात ही करें। कीट साधारण कीटनाशक से नहीं मरता। बीते वर्ष इसी कीट के प्रकोप से पूरे मध्यप्रदेश में करीब 39 प्रतिशत नुकसान हुआ था। गुना जिले में सबसे पहले यह जानकारी चांचौड़ा बीनागंज क्षेत्र से सामने आई है।