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भोज वेटलैंड के नियमों का उल्लंघन और अफसर कह रहे कि कोई नियम नहीं टूटा

बड़े तालाब के संरक्षण में लापरवाही को लेकर पर्यावरणविदों ने जताई आपत्ति।नियमों को ताक पर रख कैचमेंट में पाथ-वे का निर्माण

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Catchment

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भोपाल। भोज वेटलैंड के नियमों में साफ लिखा है कि नगर निगम बड़ा तालाब में मिलने वाले सीवेज और कैचमेंट में निर्माण को रोकेगा। इस जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही एवं अक्षम साबित होने पर निगमायुक्त सहित आला अफसर दोषी माने जाएंगे। भोज वेटलैंड की रूलिंग को नजरअंदाज कर नगर निगम कैचमेंट में पाथ-वे का निर्माण कर रहा है।

सोमवार को कलेक्टर सुदाम खाडे और निगमायुक्त बी विजय दत्ता ने मौके पर मुआयना कर इस अवैध निर्माण को क्लीनचिट देने की कोशिश की। इससे शहर के पर्यावरणविदों में रोष है। पर्यावरणविद सुभाष सी. पांडे ने आरटीआई में मिली जानकारी से खुलासा किया है कि लगातार अनदेखी के चलते बड़ा तालाब का पानी अब बी कैटेगिरी का हो चुका है, जिसे पीने लायक बनाना कठिन है। लगातार मिल रहे सीवेज और अवैध निर्माण की वजह से तालाब प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर है। इसका असर तालाब और वन विहार की बायोडायवर्सिटी पर पडऩे लगा है। प्रदूषित पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 6 की बजाए 0 से 3 प्रतिशत आंकी जा रही है, जिससे जलीय जीव सांस लेने में तकलीफ महसूस करते हैं।

एप्को की रिपोर्ट को भी कर रहे दरकिनार
नगर निगम एप्को की रिपोर्ट की अनदेखी कर रहा है। शहर के आठ वाटर फिल्टर प्लांट में वैज्ञानिक जलशोधन के इंतजाम नहीं हंै। रोजाना 10 से 12 क्विंटल फिटकरी की खपत कर पानी साफ करने का दावा किया जाता है। बड़े तालाब से प्रतिदिन 118 मिलियन लीटर पानी सप्लाई होता है। एप्को की रिपोर्ट के मुताबिक इस पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं किया जा सकता।

ऑक्सीजन की मात्रा लगातार हो रही कम
शुद्ध जल के मापदंडों पर शहर का एक भी जल स्त्रोत खरा नहीं उतरा है। ए कैटेगिरी का कोई भी जल स्त्रोत नहीं है। बड़ा तालाब सहित सभी वाटर बॉडी में ऑक्सीजन का प्रतिशत 0 से 3 मिग्रा प्रति लीटर मिला। ये कम से कम प्रति लीटर 6 मिलीग्राम होना चाहिए। इससे मछलियों व पातल प्रजाति के कछुए जैसे अधिकतम प्रतिरोधक क्षमता के जलीय जीवों की मौत हुई है।

पानी की कैटेगिरी को ऐसे समझें
ए- रासायनिक अशुद्धियों रहित पानी। भोपाल का कोई भी जल स्त्रोत इसमें शामिल नहीं है।
बी- सिंचाई योग्य पानी, जिसे रिवर्स ऑसमोसिस सिस्टम से साफ कर पीया जा सकता है।
सी- दूषित जल, जिसे ट्रीटमेंट के बाद भी पीया नहीं जा सकता।
डी- मत्स्य पालन और वन्य जीवों के पीने योग्य पानी।
ई- अत्याधिक दूषित पानी। निर्माण कार्यों मे उपयोग लायक।


एप्को के मुताबिक जल स्रोतों की कैटेगिरी
बड़ा तालाब-बी
हथाईखेड़ा, केरवा डैम-सी
छोटा तालाब-ई
शाहपुरा लेक-ई
लहारपुर डैम-ई
चार इमली
झील-ई
मोतिया तालाब-ई

नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है
भोज वेटलैंड के नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। एप्को की रिपोर्ट के अनुसार बड़े तालाब सहित अन्य जल स्त्रोतों का पानी बगैर वैज्ञानिक शोधन के पीने योग्य नहीं है। ये शहर की जनता के स्वास्थ्य से गंभीर खिलवाड़ है।
सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद्


पानी की जांच की जाती है
फिल्टर प्लांट में पानी की जांच की जाती है। एप्को की रिपोर्ट नहीं देखी है। पानी में मानवीय इस्तेमाल योग्य गुणवत्ता है। फिटकरी गंदगी को तली में इक_ा करती है।
एआर पवार, चीफ इंजीनियर, वाटर वक्र्स