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भोपाल. बरखेड़ानाथू में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम पंजाब के मोहाली, मुंबई के वानखेड़े, कोलकाता के फिरोजशाह कोटला और बेंगलुरू के स्टेडियम से ज्यादा हाइटेक होगा। ये स्टेडियम रायपुर और कोच्चि से बड़ा होगा। पवेलियन में 30 हजार सीट की क्षमता रहेगी।
उल्लेखनीय है कि जमीन का आवंटन पहले हो चुका था। इसे अमलीजामा पहनाना शुरू किया गया है। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा, कलेक्टर सुदाम खाडे, डायरेक्टर स्पोट्र्स एसएल थाउसेन, खेल विशेषज्ञ अरुणेश्वर सिंहदेव सहित अन्य पदाधिकारी मंगलवार को स्टेडियम के लिए चिह्नित जमीन देखने पहुंचे। स्टेडियम के लिए 50 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है, जो देश के बाकी स्टेडियम से अधिक है। 30 हजार प्रति सीट का खर्चा आंकते हुए इसका बजट 90 करोड़ रु. रखा गया है। मंत्री शर्मा ने प्रस्ताव को कैबिनेट में ले जाने की बात कही है।
गौरतलब है कि एक स्टेडियम के लिए 12 से 14 एकड़ जमीन की जरूरत होती है, जिसमें 5 एकड़ में ग्राउंड, 3 एकड़ में पवेलियन और 4 एकड़ पार्र्किंग के लिए जरूरी है। यहां अतिरिक्त जमीन खेल विभाग को आवंटित की गई है। मंत्री और अधिकारियों ने स्टेडियम को चार चरण में पूरा करने की बात कही है। खेल विशेषज्ञ अरुणेश्वर सिंह ने कहा कि पहले खेल ग्राउंड का निर्माण कराया जाए। उसके बाद पवेलियन और लास्ट में पार्किंग ऐसे में तीन चरणों में काम पूरा हो जाएगा। खिलाडिय़ों को खेलने के लिए ग्राउंड तो पहले मुहैया हो जाएगा। भोपाल में सबसे ज्यादा जरूरत हॉकी के लिए ग्राउंड की है।
शूटिंग रेंज, फुटबॉल मैदान भी बनेगा
खेल विभाग को आवंटित की कई जमीन में स्टेडियम के अलावा इंटीग्रेटेड स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स बनेगा। टीटी नगर से हॉकी अकादमी को यहां लाया जाएगा। हाइटेक शूटिंग रेंज, फुटबॉल ग्राउंड, खिलाडिय़ों के लिए हॉस्टल, रनिंग ट्रैक बनाया जाएगा। यहां विदेशों के खिलाड़ी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे।
कैबिनेट में प्रस्ताव के बाद तय होगी रूपरेखा
स्टेडियम की फंडिंग कौन करेगा, राज्य शासन इसके लिए रुपए देगा या फिर एमपीसीए आगे आएगी। इस पर कैबिनेट में प्रस्ताव आने के बाद रास्ता साफ होगा। खेल विभाग के डायरेक्टर डॉ. एसएल थाउसेन का कहना है कि वे खेल विभाग के मंत्री से चर्चा करेंगे, इसके बाद आगे का कार्य शुरू होगा।
ये कहता है बीसीसीआई का नियम : बीसीसीआइ किसी राज्य में दो क्रिकेट स्टेडियम की फंडिंग करता है। मप्र में इंदौर और ग्वालियर में दो स्टेडियम पहले से मौजूद हैं। इस वजह से इसका निर्माण राज्य शासन या अन्य को ही कराना होगा।
Published on:
30 Jan 2019 04:04 am
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