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टाइगर स्टेट पर संकट के बादल, 22 दिन में आठ बाघों की मौत

- वन विभाग का दावा: आपसी लड़ाई और बीमारी से हुई मौतें
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Tiger

भोपाल. कोरोना संक्रमण के बीच अप्रेल माह जंगल के लिए भी अच्छा नहीं रहा। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। यहां 22 दिन में आठ बाघों की मौत हो चुकी है। वन विभाग इन सभी मौतों के पीछे बाघों का आपसी संघर्ष और कुछ का बीमार होना बता रहा है। इन सभी बाघों की उम्र 10 साल से कम बताई जा रही है। हालांकि, लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन विभाग के अफसरों को चिंता में डाल दिया है।

इस वर्ष जनवरी से मार्च तक एक भी बाघ की मौत नहीं हुई है। इसके बाद लगातार बाघों की मौतें हो रही है। बुधवार को एक साथ दो बाघों की मौत हुई है। इनमें से एक बाघ की मौत बाघवगढ़ टाइगर रिजर्व और दूसरे बाघ की मौत मुकुंदपुर जू में हुई है। अचानक इस माह में बाघों की हो रही मौतों के संबंध में विभाग ठोस कारण नहीं निकल पाया है, इसलिए मैदानी स्तर पर बाघों की सुरक्षा प्रबंधों में ढिलाई देखी जा रही है। घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सख्ती नहीं दिखाई दे रही।
- बांधवगढ़ में सबसे ज्यादा मौत
सबसे ज्यादा बाघों की मौते बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हुई है, जबकि दूसरे नंबर पर कान्हा नेशनल पार्क है। वहीं, एक बाघ की मौत महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा में बुरहानपुर के सामान्य वन मंडल में हुई है। बताया जाता है कि बाघवगढ़ में जहां बाघ ने एक किशोरी पर हमला कर उसे मौत के घाट उतारा था, वहीं बाघ का शव मिला है। इससे उसे जहर देने की भी आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार सतना जू ने सीजेडए को बाधिन के मौत की जानकारी नहीं दी है।


- अब तक बाघों के मौत का आंकड़ा
1 अप्रेल को कान्हा में
3 अप्रेल को पेंच में
9 अप्रेल को बांधवगढ़ में
11 अप्रेल को बुरहानपुर में
13 अप्रेल को कान्हा में
17 अप्रेल को चित्रकूट में
22 अप्रेल को बांधवगढ़ में
22 अप्रेल को मुकुंदपुर जू सतना


प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ी है। बाघ टेरिटोरियल फाइट करते हैं, जो कमजोर होते हैं, वे मारे जाते हैं। एक माह में ही ऐसा क्यों हुआ इसका कारण तो नहीं बताया जा सकता है। यह इत्तेफाक ही कहा जा सकता है।
- राजेश श्रीवास्तव, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ प्रमुख मप्र

मैंने सीजेडए को पत्र लिखा कि है कि कोरोना संक्रमण दौरान जितने बाघों की मौत हो रही है, उसकी मेडिकल जांच भारत सरकार द्वारा अधिकृत लैब से कराई जाए। वैसे भी सीजेडए ने सभी राज्यों के वन विभाग मुख्यालयों को इस तरह के निर्देश पहले ही दिए थे, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। पिछले 20 से 22 दिनों में जितने बाघों की मौत हुई है, उसमें से एक के भी सैंपल जांच के लिए इन लैबों को नहीं भेजे गए हैं।
- अजय दुबे, एक्टिविस्ट, वाइल्ड लाइफ