
दारू-चिकन डिमांड कांड: अकेली पड़ीं एसडीएम शिवानी
भोपाल. दारू-चिकन और खाने-पीने के बिलों का भुगतान करने का दबाव बनाने वाले एडीएम दिलीप मंडावी के खिलाफ वाट्सऐप ग्रुप पर पोस्ट करने वाली एसडीएम शिवानी गर्ग अब सहयोगी प्रशासनिक अफसरों में अकेली पड़ गई हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के वाट्सऐप ग्रुप पर सहयोगी अफसरों ने शिवानी की जमकर आलोचना की है।
धार जिपं सीईओ संतोष वर्मा ने लिखा कि शिवानी पीडि़त नहीं हैं, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई की तरह प्रसिद्ध हो गईं। इस मामले में जांच की जानी चाहिए कि कौन सही और कौन गलत है। जो गलत हो उसे राज्य प्रशासनिक सेवा संघ से निकाल देना चाहिए। वहीं, शिवानी ने लिखा कि पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर भास्कर लक्ष्कार और वरिष्ठ अफसर सुधीर कोचर को दी थी, लेकिन दोनों ने मामला दबाया। इस कारण वाट्सऐप ग्रुप पर पोस्ट करना पड़ा।
यह है मामला
शिवानी ने एडीएम दिलीप मंडावी को लेकर ग्रुप पर पोस्ट लिखी थी कि इन्हें किसी पटवारी या तहसीलदार ने दारू-चिकन या अन्य के लिए पैसा दिया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, मंडावी पर खाने-पीने के बिलों का रोज भुगतान अधीनस्थों से कराने के आरोप थे। शिवानी की इस पोस्ट के बाद मंडावी को हटा दिया गया है।
इस मामले में परेशान हूं। मैं अब कुछ नहीं कहना चाहती हूं। जो कहना था, वह कह दिया है। आप कलेक्टर से बात कीजिए।
- शिवानी गर्ग, एसडीएम, गुना
आरोप लगा देने से कोई दोषी नहीं होता। जांच के बाद ही सही-गलत का पता चलेगा। हम जांच की मांग कर रहे हैं। यह संघ और शासन दोनों स्तर पर हो सकती है।
संतोष वर्मा, सीईओ, धार
संभागीय कमिश्नर जांच के लिए अधिकृत हैं, संघ इस पर विचार करेगा कि इस मामले में हमें क्या करना है।
मल्लिका नागर, महासचिव राज्य प्रशासनिक सेवा संघ
कलेक्टर की भूमिका कठघरे में?
शिवानी ने साफ लिखा है कि उन्होंने कलेक्टर भास्कर लक्ष्कार को चार बार बताया था, पर उन्होंने कार्रवाई नहीं की। इससे कलेक्टर की भूमिका सवालों के घेरे में आती है। संघ के ग्रुप में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की अधिकारी दिशा नागवंशी ने लिखा कि गुना कलेक्टर भी दोषी हैं। इस पूरे मामले में कलेक्टर लक्ष्कार से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
वाट्सऐप ग्रुप के चैट के प्रमुख अंश
ग्रुप पर जब मंडावी घटनाक्रम पर सवाल उठे तो शिवानी ने लिखा कि एडीएम द्वारा मेरे और अधीनस्थों पर दबाव बनाया जा रहा था। तब कुछ नहीं कहा, लेकिन रोज के साढ़े तीन-चार हजार रुपए का खर्च हो गया तो पटवारियों ने देने से मना किया। जब ये खर्च उठाना बंद किया गया तो हमसे गाड़ी छीन ली गई। ड्राइवर को अपशब्द कहे गए। पटवारी के मांग पूरी नहीं करने पर बिना बात कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने का कहकर प्रताडि़त किया गया।
कलेक्टर को मौखिक रूप से बताया
इस पर मैंने चार बार कलेक्टर को मौखिक रूप से बताया। अधीनस्थों ने भी लिखित में बताया पर उनके व्यवहार में फर्क नहीं पड़ा। फिर उनके द्वारा बिना बात एफआइआर की धमकी दी गई तो उप सचिव स्कूल शिक्षा सुधीर कोचर को फोन करके बताया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तब, ग्रुप पर मैसेज किया। इसमें क्या गलत किया।
पटवारियों का उपयोग किया
सीईओ संतोष वर्मा ने लिखा कि आश्चर्यजनक ये कि सब किसी न किसी को दोषी ठहराते दिख रहे हैं, ये नहीं देख रहे कि बिना जांच मंडावी को सजा मिली है। पूरा देश हंस रहा है। शिवानी तो सीधे तौर पर पीडि़त नहीं हैं। शिकायत पटवारियों की है। उन्होंने अपने बचाव में पटवारियों का उपयोग किया।
बहती गंगा में हाथ धोने जैसा
शिवानी रानी लक्ष्मीबाई की तरह प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी हैं। यदि कोई शिकायत है तो पोस्ट करें। कुछ का दर्द छलक रहा है, लेकिन यह पुरानी घटनाओं पर आज बहती गंगा में हाथ धोने जैसा लग रहा है।
हम प्रशासनिक अधिकारी मर्यादाओं से बंधे हैं
दिशा नागवंशी ने लिखा कि आप सब स्टेट की सर्वोच्च सेवा में सेवा लायक हो, इसलिए सलेक्ट होते हो। हर परिस्थिति से निपटने व समाधान के काबिल हो। इस केस में सही तरीके से समाधान निकालने में शिवानी फेल रही हैं। ये सच है। दोषी सभी हैं, चाहे दिलीप मंडावी हों, शिवानी हो या कलेक्टर गुना। किसी ने समस्या का समधान नहीं निकाला। हम प्रशासनिक अधिकारी मर्यादाओं से बंधे हैं। हमें इसका पालन करना चाहिए, वरना लंबे कैरियर में सफल नहीं हो पाएंगे। दूसरे कॉडर के लोग हम पर हंस रहे हैं, कल हावी होंगे।
दिलीप मंडावी को वहां से हटा दिया
मध्यप्रदेश के गुना जिले से एक एडीएम अपने नीचे के मताहतों से अजीबोगरीब मांग करते थे। एडीएम दिलीप मंडावी हर दिन किसी न किसी कर्मी से अल्कोहल और नॉनवेज की मांग करते थे। इस पर एसडीएम शिवानी गर्ग ने ग्रुप में मैसेज डालकर इसका विरोध किया था। उसके बाद सरकार ने कार्रवाई करते हुए दिलीप मंडावी को वहां से हटा दिया था।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया
दरअसल, शिवानी गर्ग ने ऑफिसियल ग्रुप में मैसेज डाला था कि अगर किसी तहसीलदार, आर आई या पटवारी ने मंडावी को शराब या चिकन पहुंचाया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उसके बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था। जैसे ही जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को यह पता चला तो एसडीएम ने ग्रुप में शामिल पटवारी और अन्य सदस्यों को बुलाया और उनके मोबाइल से इसे डिलीट भी करा दिया था।
Published on:
10 Jun 2019 01:06 pm
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