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पैडल चलाकर थक गई तो हवा से चलने वाली साइकिल बना दी, MP की इस बेटी के इनोवेशन पर सब हुए हैरान

11वीं की छात्रा ने बना दी बिना पैडल की हवा से चलने वाली साइकिल, एनसीईआरटी की सीएम ने की घोषणा, स्टूडेंट्स के वैज्ञानिक प्रयोगों को प्रोत्साहन देने के

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भोपाल

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Manish Geete

Nov 11, 2017

Cycle Run Without Pedals

Cycle Run Without Pedals

भोपाल। बिना पैडल की एक साइकिल हवा से चलती है। यह इनोवेशन किसी और देश में नहीं बल्कि ओडिशा राज्य में हुआ है। इस कारनामे को कर दिखाया है राउरकेला के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की 11वीं की छात्रा तेजस्विनी प्रियदर्शनी ने। तेजस्विनी का यह प्रोजेक्ट एनसीईआरटी की ओर से प्रशासन अकादमी में आयोजित 44वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी में एग्जीबिट हुआ है जो आम से लेकर खास के लिए सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बना हुआ है।

पत्रिका से बातचीत में तेजस्विनी ने बताया कि वो भी साइकिल से स्कूल जाती थी। स्कूल दूर होने के कारण वो काफ़ी थक जाती थी, ऐसे में उसने इस साइकिल की खोज की। तेजस्विनी को पहली बार इसका विचार तब आया, जब वह अपने पापा के साथ एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप पर गई थी। उसने देखा कि कैसे एक मैकेनिक साधारण-सी एयर गन का इस्तेमाल कर एयर प्रेशर से नट लगाते हैं। उसने सोचा कि अगर एयर गन यह काम कर सकती है तो इससे साइकिल भी चल सकती है। उसने अपना आइडिया अपने पिता नटवर गोच्चायट के साथ साझा किया। पापा ने बेटी को प्रेरित किया और जरूरी सामान दिलवाया।

मुख्यमंत्री बोले- ऐसे ही बढ़ने का जज्बा रखें छात्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बाल वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में सरकार द्वारा विद्यार्थियों द्वारा वैज्ञानिक प्रयोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 50 करोड़ रूपए की राशि से विशेष कोष बनाया जाएगा। सीएम ने विद्यार्थियों का आव्हान किया कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे कभी धूमिल नहीं होने दें, कभी भी निराश न हों और आगे बढऩे का जज्बा रखें। भारत का अतीत गौरवशाली था और युवाओं के सहयोग से वर्तमान को भी गौरवशाली बनाया जाएगा। 21वीं सदी युवाओं के भारत की सदी है, वे ही नये भारत का निर्माण करेंगे।

कैसे चलती है साइकिल
बिना पैडल के यह एयर बाइक 60 किलोमीटर 10 किलो कम्प्रेज्ड एयर सिलेंडर के सहारे चल सकती है। यह सिलेंडर साइकल के केरियर पर लगा है। अब तेजस्विनी को सिर्फ नॉब खोलनी होती है और सिलेंडर से होकर हवा पैडल के पास लगी एयर गन तक जाती है और गियर को छह अलग-अलग ब्लेड्स की सहायता से रोटेट करने लगती है। इस तरह साइकिल चलने लगती है। इसमें स्टार्टिंग नॉब है और सेफ्टी वॉल्व भी है जो अतिरिक्त एयर रिलीज करती है।

एमपी में बनेगा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी जैसा इनक्यूबेशन सेंटर
सीएम ने कहा कि विज्ञान में जीवन की हर समस्या का समाधान है, बाल वैज्ञानिकों मौलिक रूप से सोचने की आदत डालें, वैज्ञानिक आविष्कार करने में मदद देगी। सीएम ने इस दौरान बताया कि न्यूयार्क विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रदेश मे इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। इसके माध्यम से नवाचारी विचारों और प्रयोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रकाशित 'कोशिशÓ पुस्तक का विमोचन किया। इसमें बाल वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये वैज्ञानिक प्रादर्शों का संग्रहण किया गया। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह, स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी एनसीआरटी के संचालक ऋषिकेश सेनापति, लोक शिक्षण आयुक्त, अजय गंगवाल, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, दीप्ति गौड़ मुखर्जी, प्रशासन अकादमी की महानिदेशक कंचन जैन, राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक लोकेश जाटव उपस्थित रहे।

रोजाना होंगे वैज्ञानिकों के विशेष व्याख्यान
प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न वैज्ञानिकों के व्याख्यान भी होंगे। 11 नवम्बर को रीजनल कॉलेज के डॉ. वीपी गुप्ता, 12 को एनआईटीटीआर के डॉ. पीयूष वर्मा, 13 को सीएसआईआर के डॉ. रावले, 15 को आर्यभट्ट संस्थान के आलोक माण्डवगणे और 6 नवम्बर को एकल्व संस्थान के माधव केलकर व्याख्यान देंगे। यह एग्जीबिशन सुबह १0.30 से शाम 4.30 तक नि:शुल्क देखी जा सकती है।

जबलपुर में वर्ष 1987 में लगी थी एग्जीबिशन
प्रदेश में यह प्रदर्शनी दूसरी बार आयोजित की जा रही है, इसके पहले वर्ष 1987 में यह प्रदर्शनी जबलपुर में आयोजित की गई थी। इस वर्ष की प्रदर्शनी का मुख्य विषय राष्ट्र निर्माण के लिय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित है। इस प्रदर्शनी में देश के 29 राज्यों तथा 9 केन्द्र शासित प्रदेशों के 142 मॉडल आमंत्रित किए गए थे। जिनमें से १२३ स्टूडेंट्स एग्जीबिशन में आए हैं। इसके साथ ही इंस्पायर्ड अवॉर्ड योजना के तहत चयनित मप्र के १८ इनावेशन भी एग्जीबिट किए गए हैं।