
dadasaheb phalke film foundation award 2019
भोपाल। राजधानी भोपाल से ताल्लुक रखने वाले फिल्म इंस्टट्री के टैलेंट मेंटर वीरेंद्र राठौर को दादा साहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवॉर्ड-2019 बेस्ट मेंटर- फिल्म एकडेमी अवॉर्ड से नवाजा गया। चेयरमैन अश्फाक खोपेकर ने बताया कि अवॉर्ड की यह कैटेगरी इस साल ही इंट्रोड्यूस की गई है और पहले अवॉर्ड से वीरेंद्र राठौर को नवाजा गया। यू ट्यूब पर मुफ्त वीडियो सेशन के जरिए वीरेंद्र कलाकारों को फिल्म इंडस्ट्री से जुडऩे में मदद करते हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
ज्वाइन फिल्म्स के संस्थापक वीरेंद्र राठौर कहते हैं कि हर किसी को न केवल अपने सपनों साकार करने में सक्षम होना चाहिए, बल्कि धोखेबाजों के जाल में फंसे बिना फिल्मों में काम करना चाहिए। मैं फिल्म जगत में उन कलाकारों का समर्थन करता हूं जिनका कोई गॉडफादर नहीं है। बता दें कि, दादा साहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से अलग है। दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारत सरकार की ओर से दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है, जो किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है।
भोपाल से ही शुरू हुआ था सफर
वीरेंद्र ने भोपाल शहर से ही शुरुआत की थी। सी टीवी ,सिटी केबल और दूरदर्शन से शुरुआत की सबसे पहले एंकर के तौर पर फिर स्क्रिप्ट राइटर, डायरेक्शन में भी अनुभव प्राप्त किया और एडवरटाइजिंग फील्ड में बहुत सारे ऐड बनाए। वर्ष 2001 में मुंबई जाकर फिल्ममेकर बनने का निर्णय लिया लेकिन फिल्म इंडस्ट्री को अच्छे से समझना बहुत जरूरी था और इंडस्ट्री में वीरेंद्र को कोई नहीं जानता था इसलिए शून्य से शुरुआत करनी थी। सबसे पहले एक्टिंग की, फिर डबिंग उसके बाद उसके लेखन किया। सीरियल ऑफिस-ऑफिस के करीब 26 प्लॉट आईडिया लिखे और 2004 में ही अपनी पहली फिल्म 'वाइफ है तो लाइफ' से शुरुआत की, जिसे भोपाल में ही शूट किया गया। 2006 में भोजपुरी फिल्म का निर्माण किया बतौर निर्माता-निर्देशक 2007 में भी एक भोजपुरी फिल्म बनाई, उसके बाद कॉर्पोरेट वर्ल्ड की फिल्मों को बनाने का इरादा किया और बहुत सारी कॉर्पोरेट फिल्म बनाई।
जॉइन फिल्म्स डॉट कॉम को मिली थी असफलता
इसके बाद उनके मन में ख्याल आया कि क्यों ना कुछ ऐसा शुरू किया जाए जिससे कि नए लोगों को यहां की फिल्म इंडस्ट्री की सभी जानकारियां और नॉलेज मिले। अभी तक फिल्म इंडस्ट्री की सिर्फ नेगेटिविटी और गॉसिप्स ही पब्लिश रही थी। इसलिए जॉइन फिल्म्स डॉट कॉम का निर्माण किया गया। डॉट कॉम में भारी असफलता पाने के बाद भी वीरेंद्र ने अपना इरादा नहीं छोड़ा बल्कि यूट्यूब को माध्यम बनाया लोगों से जुडऩे का और उनको सिखाने का की बॉलीवुड में एंट्री कैसे करते हैं? बहुत जल्द ही दो साल में उनके साथ पांच लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ गए और इसी उपलब्धि को देखते हुए वीरेंद्र सभी शहरों में जाकर बॉलीवुड करियर वर्कशॉप करने लगे। इसे देखते हुए उन्हें दादा साहब फिल्म फाउंडेशन अवॉर्ड ने उनको 2019 का बेस्ट बॉलीवुड मेंटर चुना।
Published on:
17 May 2019 09:30 pm
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