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अपने ही सर्वे से भाजपा में मच गया हड़कंप! सामने आए ऐसे आंकड़े जिन्हें देखते ही उड़ गए होश…

अपने ही सर्वे ने उड़ा दी भाजपा की नींद,मंथन में जुटी पार्टी...

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bjp report

भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं।इन्हीं चुनावों को लेकर दोनों पार्टियां तैयारियों में जुट गई हैंं चुनावों में अपनी स्थिति को देखने के लिए कराए गए एक सर्वे में कुछ ऐसी बातें या यूं कहें आंकड़े सामने आए हैं, जिन्हें देखकर भाजपा में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार चौथी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रही भाजपा ने एक सर्वे करवाया था, लेकिन ये सर्वे उसके लिए ही परेशानी का सबब बन गया है, सर्वे में सामने आई स्थिति ने उनकी नींद उड़ा दी है।

दरअसल हाल में विधानसभा चुनावों को लेकर कराए गए इस सर्वे में मौजूदा 166 विधायकों में से 77 खतरनाक स्थिति में हैं। वहीं केवल 89 विधायक ही ऐसे हैं, जो अपने क्षेत्र में फिर से जीतते नजर आ रहे हैं। इस सर्वे के सामने आने के बाद पार्टी बड़े मंथन में जुट गई है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने हाल ही में दिल्ली की एक संस्था से सर्वे करवाया था। अपेक्स नाम की इस संस्था के सर्वे जो कुछ सामने आया उसके अनुसार भाजपा के कई विधायकों की हालत पतली है।


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सर्वे में सरकार के खिलाफ एंटीइनकमबेंसी की बात तो सामने नहीं आई हे, लेकिन कई विधायकों से स्थानीय स्तर पर जनता बेहद नाराज है।

यह है बेहद खास...
इस पूरे सर्वे में एक खास बात ये भी है कि जिस संस्था ने यह सर्वे कराया गया है वह भाजपा के ही एक बड़े नेता से जुड़ी है। संघ से भाजपा में आए यह नेता इन दिनों राष्ट्रीय पदाधिकारी भी हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक यह संस्था पहले भी भाजपा के लिए काम कर चुकी है।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि कई विधायकों के क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान न देने से इस बार उनका हारना तय लग रहा है। सर्वे में इन विधायकों के टिकट काटने की भी सलाह दी गई है।

सबसे ज्यादा हालत यहां है खराब...
सर्वे में बताया गया है कि विंध्य और बुंदेलखंड में भाजपा के मौजूदा विधायकों में से 70 फीसदी की स्थिति अच्छी नहीं है। इसके पीछे इस क्षेत्र में नेताओं का आपसी टकराव भी वजह बताया गया है।

इसके अलावा कुछ विधायकों के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस का प्रभाव बढ़ने की बात कही गई है। वहीं ग्वालियर-चंबल में भी साठ फीसदी विधायकों को डेंजर जोन में बताया गया है। मालवा के इंदौर और आसपास के जिलों में भाजपा की स्थिति मजबूत बताई गई है। महाकौशल में भी अधिकांश सीटों पर भाजपा पहले जैसी स्थिति में है। जबकि मंदसौर और नीमच, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे जिलों में इस बार सीटें कम होने की संभावना जताई गई है।

इधर, 25% आरक्षण से संतुष्ट नहीं अतिथि शिक्षक :-
प्रदेश के अतिथि शिक्षक राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति में 25 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की घोषणा से संतुष्ट नहीं हैं। इसको लेकर संघ के पदाधिकारियों में दो फाड़ हो गया है। एक गुट का नेतृत्व करने वाले मनोज मिश्रा महापंचायत में सीएम का सम्मान करने को तैयार हैं तो संघ में बहुमत का दावा करने वाले शंभूचरण दुबे का कहना है कि सीएम को संघ की मांगों की जानकारी नहीं है।

आरक्षण दिए जाने से संघ नाराज है। सरकार ऐसे लोगों के कहने पर महापंचायत बुलाने जा रही है जो वर्तमान में संघ के पदाधिकारी ही नहीं हैं। मप्र अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शंभूचरण दुबे ने बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह और स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी से मिलकर संघ की मांगों से अवगत कराने का काम किया गया है। मंत्री ने कई मांगों पर सहमति जताई है। साथ ही यह भी बताया है कि मुख्यमंत्री अतिथि शिक्षकों की सभी मांगों से अवगत नहीं हैं। इसलिए संघ अपनी मांगों की जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।

यह हैं प्रमुख मांगें
दुबे ने मांगों का जो प्रारूप तैयार किया है, उसमें कहा गया है कि अतिथि शिक्षकों का नियमितिकरण किया जाए। इनके नवीनीकरण की प्रक्रिया बंद हो और दो से चार शिक्षा सत्र में काम कर चुके अतिथि शिक्षकों को भी नियमितिकरण के दायरे में लाया जाए।

गुरुजी की भांति विभागीय परीक्षा लेकर उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण दोनों ही स्थिति में पद सुरक्षित किए जाएं और रिटायरमेंट की आयु 62 साल रखी जाए। जो डीएड बीएड नहीं कर सके हैं, उन्हें दो साल का प्रशिक्षण प्राप्त करने का समय दिया जाए।