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दत्त मंदिर में गूंजी ‘राजाराम भजन-माला’

bhopal news: श्रीकृष्ण फड़के के नेतृत्व में 20 सदस्यीय दल ने हिंदी भाषा में भजनों की एक ऐसी लड़ी पिरोई, जो गायन के साथ-साथ कदम ताल की लयबद्धता पर आधारित थी।

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bhopal news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के अरेरा कॉलोनी के गुरुदेव सेवा मंडल, दत्त मंदिर में शुक्रवार की शाम भक्ति और संगीत के तालमेल की साक्षी बनी। अवसर था राजामणि भजन-माला कदम ताल में कार्यक्रम का, जहां सामूहिक गायन की अनूठी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

20 सदस्यों के समूह की कदम ताल प्रस्तुति

श्रीकृष्ण फड़के के नेतृत्व में 20 सदस्यीय दल ने हिंदी भाषा में भजनों की एक ऐसी लड़ी पिरोई, जो गायन के साथ-साथ कदम ताल की लयबद्धता पर आधारित थी। सामूहिक गायन की यह शैली दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम की शुरुआत रात्रि 7:30 बजे हुई, जिसमें महिला और पुरुष सदस्यों ने समान उत्साह के साथ अपनी 'रामोत्सव' सेवा अर्पित की।

कालजयी भजनों से महका मंदिर प्रांगण

प्रस्तुति के दौरान संत साहित्य के अनमोल रत्नों को स्वर दिए गए। कार्यक्रम में भगवान राम का प्रसिद्ध पारंपरिक भजन गुरु कृपांजन पायो मेरे भाई से वातावरण आध्यात्मिक हो गया। इसके पश्चात संत मीराबाई का सुप्रसिद्ध पद पायो री मैंने राम रतन धन पायो और संत तुलसीदास जी द्वारा रचित ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया की प्रस्तुति ने बाल राम के स्वरूप को सजीव कर दिया।

भजनों पर झूमे श्रोता

भक्ति के इस सफर में संत कबीर का भजन साधो रे, राम बिना कछु नाही और लोकप्रिय पारंपरिक रचना श्री राम की कृपा से, सब काम हो रहा है ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का समापन रामजी के गजर और 13 गगनभेदी जयकारों के साथ हुआ, जिससे पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

वरिष्ठ कलाकारों की सुरीली संगत

भजन संध्या की सफलता में संगीत पक्ष का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का निर्देशन पंडित बलवंत पुराणिक ने किया, जिन्होंने हारमोनियम पर अपनी अंगुलियों का जादू बिखेरा। तबले पर श्रीकांत हिरवे ने थाप दी, वहीं जितेंद्र बंसल ने बांसुरी की मधुर तानों से भजनों में प्राण फूंक दिए। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय रहवासी और श्रद्धालु उपस्थित थे। श्री गुरुदेव सेवा मंडल के सदस्यों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य सामूहिक भक्ति के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और शांति का प्रसार करना है। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।