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‘विश्व खुशी दिवस’, राजयोग से जानी स्थायी आनंद की कला

mp news: मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर में विश्व खुशी दिवस के उपलक्ष्य में खुशियों का अनूठा उत्सव मनाया गया।

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World Happiness Day

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mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर में विश्व खुशी दिवस के उपलक्ष्य में खुशियों का अनूठा उत्सव मनाया गया। इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और भाई-बहनों ने सहभागिता कर जीवन में खुशी के वास्तविक विज्ञान और आध्यात्मिक महत्व को समझा। कार्यक्रम का मूल संदेश रहा कि खुशी बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे आंतरिक विचारों और दृष्टिकोण में निहित है।

खुशी संक्रामक है, इसे बांटने से बढ़ाएं: बीके नीता

सुख-शांति भवन की निदेशिका वरिष्ठ राजयोगिनी बीके नीता दीदी ने अपने प्रेरणाबोधन में कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक उपलब्धियों की अंधी दौड़ में अपनी सहज खुशी खोता जा रहा है। उन्होंने कहा कि खुशी संक्रामक है; जब हम स्वयं खुश रहते हैं, तो वह ऊर्जा स्वतः दूसरों तक पहुँचती है। वास्तविक आनंद संतोष, आत्म-स्वीकार और परमात्मा की स्मृति में ही समाया है।

विशेषज्ञों ने साझा किए सुख-समृद्धि के सूत्र

वरिष्ठ राजयोगी भ्राता रामकुमार ने कहा कि सच्ची खुशी आत्मा की मूल अवस्था है, जिसे हम व्यर्थ ही बाहरी आकर्षणों में खोजते हैं। ब्रह्माकुमारी दुर्गा दीदी (आर्किटेक्ट) ने 'खुशी का विज्ञान' विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सकारात्मक विचार न केवल मन को शांत रखते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। वहीं, ब्रह्माकुमारी हेमा बहन ने आपसी विश्वास, सहयोग और प्रेम को स्थायी आनंद का आधार बताया।

राजयोग ध्यान और 'हैप्पीनेस सर्कल' का अनुभव

कार्यक्रम के दौरान बीके सोनम बहन ने उपस्थित जनसमूह को राजयोग ध्यान का गहन अभ्यास कराया, जिससे सभी ने आत्मिक शांति और शक्ति का अनुभव किया। एक विशेष गतिविधि 'हैप्पीनेस सर्कल' का आयोजन हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने एक-दूसरे की विशेषताओं और गुणों को साझा किया। इस गतिविधि ने न केवल आपसी प्रेम को सुदृढ़ किया, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आत्म-सम्मान को भी नई ऊर्जा दी।

सेहत और खुशी का गहरा नाता

वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि "खुशी ही स्वास्थ्य है और स्वास्थ्य ही सच्चा धन है।" प्रसन्न मन से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो तनाव को कम कर जीवन को संतुलित बनाता है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहकर स्वयं प्रसन्न रहेंगे और समाज में भी खुशियों का संचार करेंगे। इस प्रकार यह आयोजन जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला सिखाने वाला प्रेरणादायक अनुभव सिद्ध हुआ।