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सिंगर देबोजीत साहा ने सिविल इंजीनियरिंग में बीई किया, पढ़िए उनके सिंगर बनने की कहानी

प्लेबैक सिंगर किशोर कुमार की जन्मस्मृति में भोपाल में हुए समारोह में आए सिंगर देबोजीत साहा ने पत्रिका को इंटरव्यू दिया। उन्होंने अपने जीवन के राज खोले और सिंगर बनने की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन पढ़ाई सिविल इंजीनियरिंग में की और करियर सिंगिंग में बनाया।

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saregamapa 2005 के विनर debojit saha ने कहा कि मैं असम के सिलचर जिले का रहने वाला हूं। मुझे बचपन से ही गाने का शौक था। हालांकि, बचपन में मैं डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन सिविल इंजीनियरिंग करने लगा। पढ़ाई करते हुए लाइव म्यूजिकल इवेंट करता। लोगों ने कहा कि तुम अच्छा गाते हो तो तुम्हें संगीत सीखना चाहिए। मैं सिविल इंजीनियरिंग के साथ संगीत भी सीखता रहा। रोज 7 से 8 घंटे रियाज करता था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी में नौकरी भी करने लगा। यहां मुझे लगा कि मैं तो सिर्फ संगीत के लिए ही बना हूं। उन्होंने मैं मुंबई आ गया, यहां पहला ब्रेक पाने के लिए खूब संघर्ष किया। फिर सारेगामापा में मुझे मौका मिला और विनर बनने के बाद तो देश-विदेश में मेरे शो होने लगे। फिर बिग बॉस में गया।

देबोजीत बोले, रिएलिटी शो जीवन बदल देता है

उन्होंने कहा कि रियलिटी शो इंसान के जीवन को वाकई में बदल देते हैं, क्योंकि यही एक ऐसा मंच है जहां सामान्य व्यक्ति भी अपनी प्रतिभा दिखाकर आसमान तक पहुंच सकता है। रियलिटी शो में वास्तविक टैलेंट ही आता है, जो छोटे से छोटे व्यक्ति को बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म दे देता है। उन्होंने कहा कि आगे मेरे कई गीत आने वाले हैं। रवींद्र सभागम केंद्र के अंजनी सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में गायक देबोजीत साहा व साथियों ने किशोर कुमार के नग्मों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया।

उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत एक हसीना थी...से की। इसके बाद फूलों के रंग से..., घुंघरू की तरह..., मुसाफिर हूं यारों..., नीले-नीले अम्बर पर..., ये शाम मस्तानी..., ये जवानी है दीवानी..., ओम शांति ओम... जैसे गीत पेश किए। अंत में अगर तुम न होते... गीत पेश कर प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ की-बोर्ड पर सोमेन कुट्टी सरकार, ड्रम पर मयूर थोंबरे, गिटार पर प्रमोद काटेकर और परकशन पर विजय पांडे ने संगत दी।