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अब प्लेटलेट्स पर नहीं बल्कि पीसीवी पर हमला कर रहा है डेंगू, अब ऐसे रहें सतर्क

फिजिशियन डॉ. आदर्श वाजपेयी बताते हैं कि जब भी डेंगू का वायरस अटैक करता है तो शरीर उसके खिलाफ एंटीबॉडी का निर्माण करती है...

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भोपाल। पुराने शहर निवासी 22 वर्षीय राकेश को डेंगू के चलते एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन भर्ती रहने के बावजूद राकेश की स्थिति बिगड़ती गई। डॉक्टरों की समझ में यह नहीं आ रहा था कि जब राकेश के प्लेटलेट्स कम नहीं हो रहे थे तबीयत क्यों बिगड़ रही है। हालत ज्यादा नाजुक होने के पर दोबारा जांच की गई तो पता चला कि पेट सेल वॉल्यूम (पीसीवी) कम हो रहा है। राकेश के शरीर में पीसीवी लेवल घटकर 20 प्रतिशत रह गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


अक्सर माना जाता है कि डेंगू के असर से शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या अचानक बहुत कम हो जाती है और इससे मरीजों की स्थिति नाजुक हो जाती है। लेकिन इस बार एेसा नहीं है। डेंगू के वायरस ने अपना स्वरूप बदल लिया है। इस डेंगू का असर प्लेटलेट्स नहीं बल्कि पीसीवी पर हो रहा है। जो मरीजों के लिए घातक साबित हो हा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज ही नहीं डॉक्टरों का पूरा फोकस प्लेटलेट्स पर है लेकिन पीसीवी भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्लेटलेट्स की कमी से मरीजों में ब्लीडिंग का खतरा रहता है, वहीं पीसीवी कम होने से कैपेलरी लीकेज होने लगता है।

कैसे होता है कैपेलरी लीकेज


फिजिशियन डॉ. आदर्श वाजपेयी बताते हैं कि जब भी डेंगू का वायरस अटैक करता है तो शरीर उसके खिलाफ एंटीबॉडी का निर्माण करती है और अपनी मेमोरी में फीड कर लेती है। यह एंटीबॉडी वायरस में मौजूद प्रोटीन को नष्ट करने लगता है। लेकिन यह प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की सबसे अंदर वाली परत कैपेलरी इंडो थीलियम में मौजूद प्रोटीन जैसा होता है जिससे एंटीबॉडी का असर इंडो थीलियम को यानी अच्छे प्रोटीन पर भी होने लगता है। इस लड़ाई में इस परत में कई सारे छेद हो जाते हैं।

क्या है पीसीवी


शरीर में करीब छह लीटर रक्त होता है। इसमें से 40 फीसदी प्लाज्मा और बाकी प्लेटलेट्स और अन्य कंपोनेंट्स होते हैं। प्लाज्मा का ही एक रूप फ्लूड भी होता है।

क्या होता है प्रभाव

* शरीर में खून की कमी होने लगती है

* ब्लड प्रेशर कम होने लगता है

* फ्लूड या प्लाज्मा लंग्स किडनी और लिवर के आसपास जमा होने लगता है जिससे मल्टी ऑर्गन फैलियर का खतरा बढ़ जाता है ।

पीसीवी 20%, हो जाता है जान का खतरा

मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अविनाश वर्मा के मुताबिक पुरुषों के शरीर में पीसीवी ५० फीसदी और महिलाओं में 40 फीसदी होता है। इसमें 20 फीसदी की कमी होने पर मरीजों को जान का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार 50 प्लेटलेट्स होने पर भी मरीजों की जानचली जाती है वहीं 20 हजार से कम होने पर मरीज बच जाता है।

बीते आठ सालों में शहर में डेंगू की स्थिति


वर्ष मरीज मौत
2009 228 02
2010 79 00
2011 06 00
2012 30 00
2013 165 00
2014 706 14
2015 57 04
2016 758 12
2017 73804


डेंगू के 750 से ज्यादा मरीज


शहर में डेंगू के 750 से ज्यादा मरीज हो गए हैं। सोमवार को शहर में 120 संदिग्ध मरीज सामने आए। इन मरीजों में से 21 मरीजों में डेंगू पॉजीटिव पाया गया। इसी तरह सोमवार को चिकनगुनिया के 15 नए मरीज मिले। इन्हे मिलाकर अब शहर में चिकनगुनिया अब 400 से ज्यादा मरीजों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है।