
kathak dance
भोपाल. रजा पर्व के अंतर्गत शनिवार को रवींद्र भवन में सुबह के सत्र में रुप संवाद का आयोजन किया गया तो शाम के सत्र में कथक नृत्यांगना ज्योति श्री वैष्णव का नृत्य हुआ। इसके बाद ऐश्वर्या विद्या रघुनाथ ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। ऐश्वर्या ने अपने संगीत में कर्नाटका की कला, संगीत और संस्कृति के साथ रचे काव्य को अपनी सुमधुर आवाज में पिरोया। उन्होंने पहली प्रस्तुति में राग ख्माज में सीतापति... सुनाया। इसके बाद राग यमुना में जंबो पते... की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद ज्योति ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत चक्रधर वंदना से की। इसके माध्यम से राजा चक्रधर के वैभव का वर्णन किया। राजा चक्रधर पर निबद्ध वंदना में रायगढ़ दरबार राजा चक्रधर, राजा कलानिधि... की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को राजा चक्रधर के वैभव को प्रस्तुत किया
नवरस ठुमरी में मां पार्वती के सौंदर्य को दशार्या
अगली कड़ी में शिव वंदना पेश किया, जिसके बोल शिव शिव शिव... और आदि शंभू... थे। इसके माध्यम से शिव के रूप सौंदर्य को दिखाया। कार्यक्रम को विस्तार देते हुए तीन ताल में रायगढ़ घराने के बोलों पर नृत्य पेश किया। इसके बाद दल बादल, परन, कड़क बिजली, गज विलास, मधु करी, पुरंदर आदि शब्दों को कथक नृत्य में पिरोकर नवोंवेश का समावेश किया। इसके बाद नवरस ठुमरी में मां पार्वती के सौंदर्य को दशार्या। इसमें शिव पार्वती विवाह के अवसर पर गौरी सलोनी तोरे नैन... पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इनके साथ संगतकार में परन पर पंडित सुनील वैष्णव, बसंती वैष्णव थे और तबला वादन में रामचंद्र सर्वे ने संगत दी।
Published on:
10 Apr 2022 12:51 am
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