
dog biting
भोपाल.गर्मी आते ही डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। नगर निगम इस समस्या से निपटने का प्रयास करता है। कुत्तों की नशबंदी से लेकर इन्हें शहर से बाहर करने का अभियान चलाया जाता है। लेकिन अब डॉग बाइट का निदान बाजारों में भी उपलब्ध है। कुत्तों को घर-मोहल्लों से दूर रखने के लिए एंटी डॉग बाइट व एंटी बार्किंग डिवाइस उपलब्ध हैं। घरों में लगने वाले डिवाइस से लेकर टॉर्च की तरह अपने साथ रखने वाले डिवाइस तक उपलब्ध हैं। इनकी कीमत पांच से छह हजार रुपए के बीच है।
हाल ही में हैदराबाद में कुत्तों ने एक मासूम को मार दिया। भोपाल में भी जनवरी 2022 के पहले दिन ही मासूम को घेरकर नोचा था। सरकारी अस्पतालों में रैबीज टीके के आंकड़े भी बताते हैं कि रोजाना शहर में पांच से सात जगह पर डॉग बाइट की घटनाएं होती हंै। डॉग बाइट की समस्या से निपटने के लिए लोग अब इन डिवाइस को खरीद रहे हैं। अपने साथ एंटी डॉग बाइट और एंटी बार्किंग डिवाइस लेकर चल रहे हैं।
इस तरह के डिवाइस बाजार में
अल्ट्रासोनिक रिपेलर
ये एक अल्ट्रासोनिक डॉग डिटरेंट डिवाइस होता है। इससे अल्ट्रासोनिक साउंड निकलता है। कॉलोनी में जब कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। इनका भौंकना और काटना अधिक हो जाता है तो इस डिवाइस को चालू कर दिया जाता है। इस साउंड के प्रति डॉग काफी संवेदनशील होते हैं। इससे वे इस जगह से हट जाते हैं।
डॉग डिटरेंट स्प्रे
इस तरह के कुछ स्प्रे बाजार में उपलब्ध हैं। कुत्तों के आक्रामक होने या अधिक भौंकने वाले कुत्ते पर स्प्रे करने से वह वहां से हट जाता है। कई बार डॉग क्षेत्र से बाहर भी हो जाते हैं।
एंटी बार्किंग विथ फ्लेश लाइट
ये उपकरण भी कुत्तों का भौंकना कम कर उनके काटे जाने की स्थितियों को घटाते हैं। इसे टॉर्च की तरह साथ रख सकते हैं। कुत्ते नजर आने पर उन पर डिवाइस से फ्लेश करने पर वे वहां से हट जाते हैं। रात के समय जो लोग घर-कार्यालय आते जाते हैं उनके लिए यह उपयोगी हो सकता है।
निगम स्तर पर ये उपाय
नगर निगम भोपाल कुत्तों की आबादी रोककर डॉग बाइट को कम करने में लगा है। इसके लिए चार जगह एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर खोले गए हैं। रोजाना 250 कुत्तों की नसबंदी कर अगले तीन से चार साल में कुत्तों की आबादी को घटते क्रम में लाने का दावा है। फिलहाल, प्रतिवर्ष करीब दो करोड़ रुपए कुत्तों की नसबंदी और एंट्री रैबीज टीके पर खर्च किए जा रहे हैं।
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डॉग बाइट रोकने के लिए निगम की टीम लगातार काम कर रही है। जहां की शिकायत मिलती है, वहां टीम कार्रवाई करती है। हम तय नियमों के अनुसार ही काम कर सकते हैं। एबीसी सेंटर की संख्या बढ़ाई जा रही है, इससे आगामी कुछ सालों में इसका असर नजर आएगा।
केवीएस चौधरी, निगमायुक्त
Published on:
24 Feb 2023 10:24 pm
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