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भगवान ‘धन्वन्तरि’ से जुड़ा है यह खास रहस्य, जानें धनतेरस पर पीतल के बर्तन खरीदना क्यों है शुभ

विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने पर होती है मां लक्ष्मी की कृपा

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dhanteras puja vidhi mantra

dhanteras puja vidhi mantra

भोपाल. दीपावली के मौके पर त्योहारों की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी तिथि के दिन ही भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ। इसलिए इस तिथि को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। पंडित सत्यनारायण भार्गव के अनुसार, भगवान धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस पर्व के दिन बर्तन खरीदने की परम्परा और महत्व है। इन्हें भगवान विष्णु का रूप माना जाता है, जिनकी चार भुजाएं हैं। इन चारों भुजाओं में शंख, चक्र, जलूका और औषध और अमृत कलश है। इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है इसलिए इस दिन पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परम्परा भी है।

पीतल इसलिए माना जाता है सर्वश्रेष्ठ
मान्यता है कि उद्भव के समय भगवान धन्वन्तरि के हाथों में अमृत का कलश था, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। वैसे तो सभी प्रकार की धातुओं का इस दिन महत्व है लेकिन पीतल धातु को इस दिन खरीदना श्रेष्ठ है। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु अच्छा फल देने के अलावा लंबे समय तक चलती है। पीतल के अलावा सोना, चांदी, स्टील, तांबा आदि भी खरीद सकते हैं।

ऐसे करें पूजा-अर्चना
भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति या चित्र को पूर्व दिशा में स्थापित करके निम्न मंत्र से उनका आह्वान करना लाभकारी माना जाता है।
'सत्यं च येन निरतं रोगं विद्युतं, अन्वेषित च सविधिं अरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपं, धनवन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यम्।।'
मंत्रोच्चारण के बाद पूजा स्थल पर जल छोड़ें। भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति पर रोली, चावल, गुलाब के पुष्पादि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का भोग लगाने के बाद पुन: जल छोड़ें। धन्वन्तरि को पान, लांैग, सुपारी, मौली, श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाकर प्रणाम करें।

IMAGE CREDIT: patrika

धनतेरस के दिन करें यह सामान्य कार्य