
डायल-100 का टेंडर निरस्त, जय अंबे ने एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट में दी थी गलत जानकारी
भोपाल. आपाताकालीन सेवा डायल-100 को नए कलेवर में देखने में अभी और इंतजार करना होगा। पिछले महीने अप्रेल में आगामी पांच साल के लिए की गई टेंडर प्रक्रिया के बाद इसमें नया पेच आ गया है। दरअसल, टेंडर पाने वाली छत्तीसगढ़ की जय अंबे इमजरेंसी सर्विसेज ने एक्सीपीरियंस सर्टिफिकेट में गलत जानकारी मुहैया कराई है। इस मामले में दूसरे नंबर पर रही कंपनी कोर्ट चली गई। इधर मामले की जानकारी लगने पर दूरसंचार शाखा ने जय अंबे कंपनी से दस्तावेज में दिखाए गए 400 जीपीआरएस वाहनों की सूची तलब की। कंपनी ने अभी तक ये सूची न तो कोर्ट को और न ही दूरसंचार शाखा को मुहैया कराई है। नतीजतन टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। अब गृह विभाग के निर्देशानुसार आगामी टेंडर की कार्रवाई की जाएगी। मालूम हो कि महीनों की मशक्कत के बाद अप्रेल में पूरी हुई टेंडर प्रक्रिया में जय अंबे ने दूसरे स्थान पर रही कंपनी से तकरीबन 100 करोड़ रुपए कम में यानी 715 करोड़ रुपए में पांच साल के लिए डायल-100 का टेंडर हासिल किया था। वाहनों के लिए सरकार 210 करोड़ रुपए ईधन पर खर्च करती। इधर टेंडर प्रक्रिया होने और नई कंपनी का चयन होने तक मौजूदा कंपनी भारत विकास ग्रुप ही डायल-100 का जिम्मा संभालेगी। इससे कंडम हो चुके अधिकतर वाहनों पर ही डायल-100 सेवा दौड़ेगी। एडीजी दूरसंचार संजय कुमार झा के मुताबिक कंपनी से वाहनों की सूची मांगी गई थी, जो नहीं दी गई है। इसके चलते टेंडर निरस्त किया गया है। आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डायल-100 दूसरे चरण में ये देने का है दावा
डायल-100 सेवा के दूसरे चरण यानी 2021-2026 में शुरुआत में एक हजार वाहनों की जगह 1200 नए वाहन लगाए जाना थे। शहरी क्षेत्र के लिए इनोवा तो ग्रामीण के लिए बोलेरो वाहन को मंजूरी मिली थी। बाद में वाहनों की संख्या 2000 तक किए जाने की बात कही गई थी। वाहनों में डैश बोर्ड कैमरे तो वाहन पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी वार्न कैमरों की व्यवस्था की जानी थी, जिससे लोकेशन की लाइव फुटेज कंट्रोल रूम को मिलती रहे। इसके अलावा कॉलसेंटर की क्षमता को बढ़ाया जाना था। इसके लिए राज्य सरकार ने 1084 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था।
कंपनी ने नहीं दिया नोटिस का जवाब
एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट में गलत जानकारी देने पर दूरसंचार शाखा ने जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इसके साथ ही टेंडर के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार जीपीएस सिस्टम से लैस वाहनों की जानकारी मांगी थी। ये जानकारी कंपनी द्वारा नहीं दी गई है। सूत्रों के मुताबिक गलत जानकारी देने के कारण कंपनी पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यहां बता दें, जय अंबे को प्रदेश में एंबुलेंस सेवा के संचालन का भी काम मिला है। हालांकि इसे भी तय समय से तकरीबन दो से तीन महीने बाद शुरू किया जा सका।
Published on:
02 Jun 2022 10:24 pm
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