
सावरकर को भाजपा क्यों देना चाहती है भारत रत्न, कांग्रेस इस कारण कर रही है सर्वोच्च सम्मान देना का विरोध
भोपाल.महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र को लेकर सियासत शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के चुनावी घोषणा पत्र का असर अब मध्यप्रदेश की सियासत में दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने भाजपा के घोषणा पत्र पर आपत्ति उठाई है। महाराष्ट्र चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। इस वादे के साथ ही सावरकर को लेकर चर्चाओं का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है।
क्या कहा दिग्विजय सिंह ने
झाबुआ में मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा- वीर सावरकर के जिंदगी के दो पहलू थे। पहले पहलू में अंग्रेजों से माफी मांगने के बाद लौटने पर स्वाधीनता संग्राम में उनकी भागीदारी। जबकि दूसरे पहलू में उनका नाम गांधी की हत्या के मामले में साजिश रचने वाले के तौर पर दर्ज किया गया था।
क्या है दिग्विजय सिंह के बयान के मायने
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर जानकारों का कहना है कि भाजपा खुद चाहती है कि इस मुद्दे पर राजनीति हो। अगर भाजपा वीर सावरकर को भारत रत्न देना चाहती है तो पांच साल से केन्द्र में उनकी सरकार है। भाजपा उनके नाम को आगे बढ़ा सकती थी। लेकिन भाजपा चाहती है इस मुद्दे पर कांग्रेस बयानबाजी करे जिससे नए वोटरों को लुभाया जा सका। भाजपा महाराष्ट्र चुनाव में व्यवाहारिकता के मुद्दे से हटकर सावरकर पर सियासत कर रही है और दिग्विजय सिंह उस मुद्दे पर बयान देकर कहीं ना कहीं एक बार फिर से कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
कौन थे सावरकर
वीर सावरकर का जन्म 1883 में मुंबई में हुआ था। वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी थे। इसके साथ ही वह एक राजनेता, वकील, लेखक और हिंदुत्व के बड़े प्रचारक थे।
भाजपा क्यों देना चाहती है भारत रत्न
जानकारों का कहना है कि भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अहम मुद्दों से ध्यान हटा रही है। इसलिए बारत रत्न की बात कर रही है। जानकारों का कहना है कि भाजपा महाराष्ट में मराठी वोटों को साधने के लिए वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा कर रही है। इसके साथ-साथ ही भाजपा हिन्दुत्व की विचारधारा पर आगे बढ़ रही है। वीर सावरकर हिन्दुत्व की विचारधारा के बड़े समर्थक और प्रचारक थे। बता दें कि वर्ष 2000 में वाजपेयी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्पति केआर नारायणन के पास सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया था।
कांग्रेस क्यों कर रही है विरोध
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा है कि वीर सावरकर के जीवन के दो पहलू है। बता दें कि साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद विनायक दामोदर सावरकर को गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के लिए मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया था। हांलाकि उन्हें फरवरी 1949 में बरी कर दिया गया था। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने अंग्रेजो से माफी भी मांगी थी।
Updated on:
17 Oct 2019 12:47 pm
Published on:
17 Oct 2019 11:57 am
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