
भोपाल। गुजरात चुनाव मॉडल से मिली ग्रांड सक्सेस के बाद बीजेपी में खुशी का जबरदस्त माहौल बना हुआ है। लेकिन जीत के इस सिलसिले ने मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह की कैबिनेट के मंत्रियों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी है। दरअसल अब मध्यप्रदेश में भी गुजरात मॉडल की तर्ज पर चुनाव लडऩे की तैयारी की जाने की मांग उठ रही है। जिसके बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं की गर्माहट है। कई मंत्रियों की सांसें उखडऩे भी लगी हैं। तो कोई अपने दिल की धड़कनों को थामने की कोशिश में लगा है।
यहां आपको बताते चलें कि गुजरात में चुनाव से ठीक पहले एंटी इंकम्बेंसी के फेक्टर को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट ही बदल दी गई थी। कई वरिष्ठों के टिकट काटकर नए चेहरों को उम्मीदवार बनाया गया था। और इसी कदम को गुजरात में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का आधार माना जा रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश में मंत्रियों के दिलों की धड़कनें बढऩा लाजमी है, पता नहीं कब किस पर गाज गिरे..किसे हटा दिया जाए और किस नए चेहरे को सामने खड़ा कर दिया जाए..? फिलहाल मध्यप्रदेश में भी चुनाव से पहले कैबिनेट में बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर अब तेज हो गया है। इसमें कई नॉन-परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को हटाने और कई के विभाग बदलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। चर्चा यह भी है कि सिंधिया गुट के मंत्रियों पर गाज गिराई जा सकती है।
गुजरात की जीत एमपी में दोहराने की मांग
गुजरात में चुनाव से पहले सत्ता और संगठन दोनों में ही बड़े फेरबदल किए गए थे। इसी फेरबदल को ऐतिहासिक जीत का कारण माना जा रहा है। आपको बता दें कि गुजरात में 182 में से बीजेपी ने 156 सीट की ऐतिहासिक जीत हासिल की है। अब गुजरात के इस मॉडल को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर चर्चा जोरों पर है।
इन्होंने छेड़ी मप्र में गुजरात मॉडल की चर्चा
आपको बताते चलें कि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने हरदा में गुजरात मॉडल को पूरे देश में लागू करने की बात कही है। वहीं बीजेपी के मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी ने तो इस संदर्भ की एक चिट्ठी लिखकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेज दी है। इस चिट्ठी में उन्होंने मध्यप्रदेश में गुजरात मॉडल लागू करने की बात कही है। ऐसे में बीजेपी के अंदर से ही उठने वाली बदलाव की इस मांग ने मंत्रियों और विधायकों का दिन का चैन और रात का सकून छीन लिया है।
एक साल से भी कम समय है शेष
आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम का समय बचा है। बीजेपी 2018 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से दूर हो गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस की सरकार गिर गई। फिर बीजेपी ने सरकार बना ली। अब पार्टी पिछली कोई गलती दोहराना नहीं चाहती है। शिवराज कैबिनेट में अभी चार मंत्री पद खाली है। पार्टी चुनाव से पहले कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को साधना चाहती है। ऐसे में नॉन परफार्मर मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चा तेज है। इससे एंटी-इंकम्बेंसी फेक्टर को भी कम करने का प्रयास किया जा सकता है।
Updated on:
12 Dec 2022 03:59 pm
Published on:
12 Dec 2022 03:58 pm
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