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बंद हुआ बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का डिस्टेंस एजुकेशन

-2 साल से एक भी एडमिशन नहीं, जानकारी के अभाव में छात्र हो रहे परेशान-अंकसूची, डिग्री और त्रुटि सुधार के लिए लगा रहे विभाग के चक्कर

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भोपाल.
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) में दूरवर्ती शिक्षा संस्थान पूर्व में डिग्री और डिप्लोमा कोर्स संचालित करता रहा है। बहुत कम खर्च पर यहां से घर पर रहकर अभ्यर्थी विभिन्न प्रोफेशनल कोर्स में डिग्री और डिप्लोमा कर सकते थे, लेकिन विवि में दो साल से यह कोर्स बंद कर दिए हैं। हालांकि इसकी कोई अधिकृत सूचना जारी न होने के कारण अब भी छात्र-छात्राएं विभाग के चक्कार काट रहे हैं। इनमें पूर्व छात्र जहां अंकसूची, डिग्री के लिए परेशान हो रहे हैं, तो वहीं कुछ छात्र नए कोर्स में प्रवेश के लिए भी आते हैं, लेकिन कोई जानकारी न मिलने के कारण खाली लौट रहे हैं। स्थिति यह है कि डिपार्टमेंट में छात्रों की समस्या सुनन के लिए एक चपरासी तक नहीं हैं।
बीयू में 49 साल पहले हुई थी स्थापना
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा संस्थान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां से बीए, बी.कॉम, बीबीए, एमए (राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य), बीएलआईएससी, एमएलआईएससी, बीजसी, एमजेसी, मनोवैज्ञानिक परामर्श में पीजी डिप्लोमा, कार्मिक प्रबंधन, विपणन में विभिन्न यूजी, पीजी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में कोर्स कराए जाते थे।
हजारों लोगों ने डिस्टेंस से डिग्री कोर्स किए हैं
विवि के डिस्टेंस एजुकेशन संस्थान से सैकड़ों जाने-माने पत्रकार के अलावा अन्य सरकारी विभाग के कार्यरत अधिकारी कर्मचारी यहां के छात्र रहे हैं, जो नौकरी के साथ-साथ बैचलर और मास्टर डिग्री लेकर गए हैं। दो साल से ऐसे सैकड़ों लोगों को निराशा ही हाथ लग रही है, जो डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री कोर्स करना चाहते हैं। संस्थान के प्रबंधन का कहना है कि यूजीसी के आदेश के बाद इस डिपार्टमेंट को बंद किया गया है।

यह है कारण
यूजीसी के नए नियम के अनुसार केवल ए-ग्रेड यूनिवर्सिटी ही दूरवर्ती शिक्षा केंद्र का संचालन कर सकती हैं। बीयू के पास अभी तक केवल बी-ग्रेड है। ऐसे में बीयू को अपना दूरवर्ती शिक्षा केंद्र बंद करना होगा। हालांकि यूजीसी के आदेश के बाद भी बीयू के विभाग बंद करने संबंधी कोई सूचना अब तक जारी नहीं की है।
पूरक के छात्र को रहे परेशान
बीयू के दूरवर्ती शिक्षा से कोर्स करने रहे लगभग 40 विद्यार्थी अब भी ऐसे हैं, जिनकी पूरक परीक्षा नहीं हो सकी हैं। यह छात्र दो साल से बीयू के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इन्हें यह बताने वाला कोई नहीं है कि परीक्षा अब होगी।