
Airport MRO : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एयरपोर्ट के पास 500 करोड़ रुपए से एमआरओ सेंटर यानी मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल का सेंटर बनने की घोषणा के साथ ही यहां एविएशन क्षेत्र में नौकरियों की उमीद बढ़ने लगी हैं। जीआइएस समिट में ही इसे लेकर घोषणा हुई थी। ये कैसा होगा? कितने बड़े स्वरूप में आएगा? कितनी नौकरियां बनेंगी और कितना फिजिबल रहेगा? अभी इन सवालों के जवाब आना बाकी हैं। शासन से जुड़े अफसरों के अनुसार अगर मध्यमवर्गीय सेंटर भी स्थापित होता है तो भी एक हजार से अधिक रोजगार बनेंगे।
सह एक ऐसा सेटअप या सुविधा होती है, जहां विमानों, उनके उपकरणों और संबंधित प्रणालियों की मरमत, रखरखाव और ओवरहालिंग यानी हवाई जहाज की पूरी तरह से जांच और पुनर्निर्माण किया जा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार, उम्मीदवार को पांच कोर्स करने होते हैं, जिन्हें उत्तीर्ण करना भी जरूरी है। हर कोर्स लगभग 3 से 4 महीने का होता है, इसलिए एयरक्राफ्ट मैकेनिक प्रोग्राम पूरा होने में लगभग 18 से 19 महीने लगते हैं।
मामले को लेकर शहरी आवास एवं विकास के पीएस संजय शुक्ला ने बताया कि, अभी घोषणा हुई है। धीरे-धीरे इसका स्वरूप सामने आएगा। हमारे अधिकारी लगातार निवेशकों के संपर्क में है। उमीद है कि ये एक बड़ी और बेहतर सौगात भोपाल के लिए साबित होगी।
-विमान के नियमित निरीक्षण, छोटे सुधार और आवश्यक रखरखाव कार्य।
-विमान के पुर्जों या सिस्टम में किसी खराबी को ठीक करना।
-विमान के इंजनों, एवियोनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम का गहन निरीक्षण और पुनर्निर्माण।
-एयरलाइंस के लिए आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और उपकरणों का भंडारण और वितरण।
एमआरओ में विभिन्न स्तरों पर नौकरियों के अवसर होते हैं। इसमें तकनीकी और इंजीनियरिंग स्टाफ, एविएशन मैकेनिक, एवियोनिक्स इंजीनियर, एयरोस्पेस डिजाइन इंजीनियर, इंजन और पुर्जों के विशेषज्ञ मेंटेनेंस क्रू और निरीक्षण अधिकारी आदि है।
-इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली
-राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद
-नागपुर एमआरओ हब साझेदारी में है
-कैंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरु
-हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के केंद्र हैं
Published on:
01 Mar 2025 02:14 pm

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